गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों में घमासान मचा हुआ है, आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. ज़बानी हमले भी खूब हो रहे हैं , विशेषकर आम आदमी पार्टी और सत्ताधारी भाजपा के बीच. भाजपा ने कल इस चुनाव में समान नागरिक संहिता का मुद्दा छेड़कर एक नयी बहस की शुरुआत कर दी है. यह मुद्दा इतना संवेदनशील है और भाजपा की राजनीति को बहुत सूट करता है इसका अंदाज़ा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को बखूबी है और इसीलिए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने उत्तराखंड के चुनाव के पहले UCC पर एक समिति बनाई थी लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह समिति अब अपने घर चली गई और अब गुजरात चुनाव के पहले समिति बनाई गयी है जिसका नतीजा भी उत्तराखंड जैसा होगा क्योंकि यह समिति भी चुनाव के बाद अपने घर चली जाएगी. केजरीवाल ने सवाल किया कि भाजपा UCC पर समिति मध्यप्रदेश या उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं बनाती। केजरीवाल ने कहा कि भाजपा की नियत अगर समान नागरिक संहिता लागू करने की है तो पूरे देश में क्यों नहीं लागू करते, क्या उसके लिए लोकसभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं?
बता दें कि गुजरात सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक समिति गठित की है और कल इसकी जानकारी दी है. शनिवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान इस समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी और केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कल पत्रकारों को इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले इस समिति का गठन कर दिया जाएगा. हर्ष सिंघवी के इस बयान का यही मतलब निकाला जा सकता है कि भाजपा राजनीतिक फायदे के लिए UCC मुद्दे को ला रही है.
