Site icon Buziness Bytes Hindi

जांच की आंच से अभी भी दूर उत्तर प्रदेश के रसूखदार IAS अफसर


जांच की आंच से अभी भी दूर उत्तर प्रदेश के रसूखदार IAS अफसर

लखनऊ, उत्तर प्रदेश स्मारक घोटाले की विजिलेंस जांच से अभी भी ‘बड़े’ और रसूखदार अफसर कोसों दूर हैं। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी से कड़ी पूछताछ के बावजूद विजिलेंस बड़ों की गिरफ्तारी से परहेज कर रही है। पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर भी विजिलेंस मेहरबान है तभी कुशवाहा पूछताछ से भाग रहे हैं लेकिन विजिलेंस सख्ती नहीं कर पा रही है।

कुशवाहा ने बीमारी का बहाना बनाकर विजिलेंस को सिर्फ इसलिए टरकाया है क्योंकि जिन इंजीनियरों की गिरफ्तारी हुई है उन्होंने कुशवाहा के गुनाहों का कच्चा चिटठा एजेंसी के सामने खोला है। उसके बावजूद अभी कई ऐसे इंजीनियर विजिलेंस के शिकंजे से दूर हैं जिन्होंने अपनी कंपनियों से स्मारक घोटाले के जरिये करोड़ों की कमाई की है। स्मारक घोटाले में फंसे इंजीनियरों के रसूख का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि हाईकोर्ट की निर्माण इकाई में भी यही इंजीनियर तैनात किये गए थे। निर्माण निगम के एक इंजीनियर के आरएमसी प्लांट के जरिये न सिर्फ स्मारकों के निर्माण बल्कि पूर्व सीएम मायावती के सरकारी आवास में भी ठेके दिए गए। ये इंजीनियर अभी भी विजिलेंस के शिकंजे से बाहर है।

ऐसे कई इंजीनियर हैं जिनके ऊपर स्मारक घोटाले की जाँच की आंच नहीं पहुंची है। सिर्फ इंजीनियर ही नहीं कई फर्मों के ऊपर भी विजिलेंस मेहरबान है। उसमें से एक लखनऊ मार्बल है। इस कम्पनी को स्मारक घोटाले में करोड़ों के पत्थर ठेके दिए गए थे लोकायुक्त ने भी इस फर्म को दोषी ठहराया था। लेकिन विजिलेंस ऐसी तमाम फर्मों पर मेहरबान है।

Read also: लखीमपुर खीरी मामले में सीओ समेत दो पुलिस अफसर सस्पेंड

लखनऊ मार्बल के मालिक आदित्य अग्रवाल पर एसएसपी रहते आशुतोष पांडेय ने न सिर्फ शिकंजा कसा था बल्कि गिरफ्तारी तक की थी। तकरीबन आधा दर्जन मामलों में शिकंजा कसने के बाद पांडेय को दबाव में कदम पीछे खींचने पर मजबूर किया गया। सिर्फ निर्माण निगम के इंजिनियर ही नहीं खनन विभाग के तमाम अफसरों पर भी विजिलेंस मेहरबान है। इनमे से तमाम अफसरों को मौजूदा दौर में भी अहम तैनातियों से नवाज़ा गया है।

Read also: रिवर फ्रंट घोटाला: मेरठ में तैनात आईएएस अधिकारी की ससुराल पर सीबीआई का छापा

अगला नंबर एलडीए का है। जहां संयुक्त निदेशक भूमि अर्जन के पद पर रहे एसबी मिश्रा को भी विजिलेंस मानो क्लीनचिट दे रहा है फिलहाल ये अफसर एक बड़े बिल्डर की कम्पनी में अहम पद पर बैठा है। विजिलेंस ने स्मारक घोटाले में उन आधा दर्जन आईएएस अफसरों को भी बक्श रखा है जिनके गुनाहों का खुलासा ईओडब्ल्यू के एडीजी की प्रारम्भिक रिपोर्ट में दिया था। लेकिन तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया। विजिलेंस फिलहाल स्मारक घोटाले की जाँच को लोकायुक्त रिपोर्ट के इर्दगिर्द ही समेटे है ताकि बड़े नामों को बचाया जा सके I

Exit mobile version