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लो जी! फिर शुरू हो गया महिमंडन का खेल


लो जी! फिर शुरू हो गया महिमंडन का खेल

-फरीद वारसी


देश में कोरोना की दूसरी रफ्तार कुछ हद तक भले ही धीमी पड़ी हो, पर मृतकों की संख्या में निरतंर इजाफा हो रहा है। जो निसंदेह चिंता और डर की बात है। अब तक मरने वालों की संख्या 2 लाख 90 हजार के आंकड़े तक पहुंच गई हैं। इस बीच ब्लैक फंगस बीमारी ने मुसीबतों को और भी बढ़ाने का काम किया है। विदेशों में कोरोना खूब हुआ। लेकिन वहां की तुलना में ब्लैक फंगस अपने देश में इतना क्यों हो रहा है, इसको लेकर विशेषज्ञ चितिंत हैं। जिन्होंने यह सवाल उठाया है कि कहीं हम दूषित आक्सीजन और डिस्टिल्ड वाॅटर की जगह नल के पानी का प्रयोग तो नहीं कर रहे हैं। बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने ब्लैक फंगस की नई चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। उम्मीद की जाती है कि कई राज्यों द्वारा ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किए जाने के बाद सरकार के स्तर से वह लापरवाही देखने को नहीं मिलेगी, जो कोरोना की दूसरी लहर से निपटने से पूर्व दिखी थी। इसी सब के बीच प्रधानमंत्री मोदी का महिमामंडन करने का भाजपा का चिरपरिचित खेल शुरू हो गया है।

मालूम हो कि कोरोना के भयावह दूसरे कालखंड से निपटने में असफल मोदी सरकार की सारे देश में आलोचना हो रही है और विदेशों में छवि धूमिल हुई है सो अलग। इस बात की आशंका पहले ही व्यक्त की जा रही थी कि ऐसा कुछ न कुछ जरूर होगा कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री की छवि को निखारने का काम होगा। जो योजनाबद्ध तरीके से शुरू हुआ। जिसके चलते भाजपा के प्रति आस्था रखने वाले लेखकों के लेख समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री को क्लीनचिट देने और विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री की जा आलोचना को गैरजिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई है। तो दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अपने ताजातरीन बयान में कहा कि मोदी हैं तो देश बच गया। अगर कांगे्रस होती तो न जाने क्या होता। स्वतंत्र देव सिंह का यह बयान शायद ही किसी के गले से उतरा हो। अपनी कमियों को ढाकने के लिए विपक्ष पर उंगलियां उठाना, भाजपा का बहुत पुराना खेल है। पर, इस बार कारगर होता इसलिए नहीं दिख रहा है क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में नाकाम रही मोदी सरकार से पीड़ित और चितिंत देशवासियों को सकते में डाल दिया। लोग अपनों को खोने दर्द नहीं भूल पा रहे हैं। वैसे स्वतंत्र देव सिंह को इस तरह का विवादास्पद बयान देने से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस वक्तव्य को याद कर लेना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर के बढ़ने में सरकार और प्रशासन जिम्मेदार है। और तो और यूपी के ही एक भाजपा विधायक ने कहा कि अगर मैं कुछ बोलूंगा तो मेरे ऊपर देशद्रोह का मुकदमा लग जाएगा। या फिर स्वतंत्र देव को इस खबर की गहराई को समझ लेना चाहिए जिसके तहत यह खबर आई कि उत्तराखंड के एक भाजपा विधायक को गांवों वालों ने फटकारते हुए कहा कि अगली बार वोट मांगने आओगे तो लाठी मारकर कर भागाएंगे। जो यह दर्शाता है कि भाजपा सरकारों के प्रति लोगों की नाराजागी चरम पर है। पंचायत चुनाव परिणाम इसकी एक बानगी हैं। अतः इसी नाराजगी को कम के लिए सकारात्मक कार्य करने के बजाए दुष्प्रचार का सहारा लिया जा रहा है।

जबकि यह किसी से छिपा नहीं की कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में असफल मोदी सरकार पर ऐसे गंभीर सवाल उठे हैं जिनका जवाब देना मोदी सरकार के लिए आसान नहीं हैं। सुप्रीमकोर्ट-दिल्ली हाईकोर्ट ने आक्सीजन और वैक्सीन की कमी पर मोदी सरकार को कितनी बार कड़ी फटकार लगाई उसे लोग भूले नहीं हैं। विदित हो कि पिछला साल खत्म होने से पहले ही इस बात का श्रेय प्रधानमंत्री को दिया जाने लगा कि मोदी के नेतृत्व में कोरोना पर विजय प्राप्त कर ली गई और भाजपा द्वारा कोरोना का राजनीतिकरण करते हुए बिहार चुनाव में उतरा गया और यह घोषणा की गई कि चुनाव जीतने पर सबको मुफ्त वैक्सीन मिलेगी। मुफ्त वैक्सीन तो दूर की बात है, जब देशवासियों को वैक्सीन की जरूरत थी, तो उसे विदेश निर्यात कर दिया गया। टैस्टिंग के काम में क्यों शिथलिता बरती गई, जिसका खामियाजा आज सारा देश भुगत रहा है। टीका उपलब्ध नहीं, फिर भी टीका उत्सव मानने की घोषणा आनन-फानन में कर दी गई। सबसे बड़ी बात यह कि विशेषज्ञों द्वारा दूसरी लहर के आने की जो चेतावनी दी गई थी, उसे क्यों सुन कर अनुसना कर दिया गया। शहरी-ग्रामीण हलको की बदतर चिकित्सा व्यवस्था ने दुनिया में भारत को शर्मसार कर दिया। आखिर ये किसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही थी। सत्तापक्ष द्वारा जिस विपक्ष को हेय दृष्टि से देखा जाता है। विपदा के समय प्रधानमंत्री विदेश के नेताओं से तो बात कर सकते हैं, लेकिन अपने विपक्षी नेताओं से क्या उन्होंने कभी बात की। या फिर उस पर यही दोषारोपण होता रहेगा कि प्रधानमंत्री जो बहुत कुुछ कर रहे है, लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री को बदनाम करने में लगा हुआ है। अतः ये वे गंभीर सवाल हैं, जो मोदी सरकार का लंबे समय तक पीछा करते रहेंगे। टूलकिट मामले में भाजपा ने कांग्रेस को घेरा। पर, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा पर उलटे ही सवाल उठने लगे। इसलिए बेहतर यही होगा कि सरकार व संगठन के लोग ब्लैक फंगस व तीसरी लहर की चुनौती से निपटने के लिए अभी से कारगर कदम उठाएं और प्रधानमंत्री का बेवजह यशगान कर खुद अपनी जगहंसाई न कराएं। क्योंकि मोदी हैं तो मुमकिन है! का नारा भाजपा को कहीं मंहगा न पड़ जाए। वैसे प्रधानमंत्री का पिछला भावुकतापूर्ण संबोधन भी किसी रणनीति को हिस्सा हो, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।

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