- मिग-21 क्रैश होने से वायु सेना में फाइटर पायलट अभिनव चौधरी हुए शहीद
- बेटे के गम में दुखी पिता सतेन्द्र चौधरी ने कहा, बस अब आगे किसी का लाल न जाए
मेरठ। गुरुवार रात को पंजाब के मोगा में मिग-21 क्रैश में मेरठ के अभिनव चौधरी शहीद हो गये। वायु सेना में फाइटर पायलट अभिनव चौधरी के पिता सतेंद्र चौधरी ने आंखों में आंसू लिये हाथ जोड़कर सरकार से मिग-21 विमानों को तुरंत बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा, मेरा लाल तो चला गया, बस अब आगे किसी का लाल न जाये।
मेरठ की गंगासागर काॅलोनी में अपने जवान बेटे की मौत से टूट चुके शहीद अभिनव चौधरी के पिता सतेंद्र चौधरी ने कहा कि देश के जवान पुराने जहाज उड़ा रहे हैं। मिग-21 उड़ाते हुए पहले भी देश के लाल शहीद हो चुके हैं। यह जवानों की जिंदगी का सवाल है इसलिये देश में मिग-21 को उड़ाना तत्काल बंद कर देना चाहिये।
उड़ता हुआ ताबूत कहलाते हैं मिग-21
अपनी युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय वायु सेना ने पहली बार 1963 में सोवियत मूल के 874 सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों- मिग-21 को अपने बेड़े में शामिल किया था। इन विमानों ने भारतीय वायुसेना को सशक्त बनाने में मदद तो कि लेकिन इन विमानों के तकनीकी कारणों से दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले भी सामने आते रहे। 1971-2012 के बीच 400 से ज्यादा मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इन विमान दुर्घटनाओं में अनेक पायलटों की जान जाने के बाद इन्हें फ्लाइंग काॅफिन (उड़ता हुआ ताबूत) कहा जाने लगा। भारतीय वायुसेना में सबसे लंबे समय से अपनी सेवा देने वाले लड़ाकू विमान मिग-21 को अब तक रिटायर नहीं किया जा रहा है। लेकिन पुराने हो चले मिग-21 विमान के तकनीकी कारणों से दुर्घटनाग्रस्त होने के अनेक मामले सामने आने के बावजूद इन विमानों का संचालन करना पायलटो की जान से साथ खिलवाड़ है।

