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बहू ने ताला तोड़ किया घर पर कब्जा, बुजुर्ग सास-ससुर परेशान


बहू ने ताला तोड़ किया घर पर कब्जा, बुजुर्ग सास-ससुर परेशान

महिला हित में बनाये गये कानूनों का किया जा रहा दुरूपयोग
बाहरी दवाब के चलते पुलिस भी नहीं उठा रही ठोस कदम

रुड़की। महिलाओं के हित और उनका उत्पीड़न रोकने के लिये अनेक कानून बनाये गये हैं। उद्देश्य यह है कि कोई भी महिला खुद को असहाय महसूस न करे और उसके साथ अन्याय होने पर कानून उसका पूर्णतया साथ निभाये। मगर कुछ महिलाएं इन कानूनों का दुरूपयोग करती हैं जिसके कारण उनके पति के साथ सभी ससुराल पक्ष के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं पुलिस भी महिला के पक्ष में तो खड़ी होती है मगर महिला यदि ससुराल पक्ष का उत्पीड़न कर रही है तो वह चुप्पी साध लेती है। ऐसा ही कुछ हुआ है रुड़की में रहने वाले बुजुर्ग दंपति के साथ जो अपनी बहू के उत्पीड़न से परेशान हैं। बहू उनके घर का ताला तोड़कर घर में घुसकर बैठ गयी मगर शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने महिला के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। सवाल यह है कि यदि बहू ने अपनी ससुराल में कोई अप्रिय कदम उठा लिया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।

सिविल लाइन कोतवाली क्षेत्र की कालोनी में रहने वाले एक युवक का विवाह करीब छह माह पहले मेरठ निवासी युक्ति से हुआ था। शादी के चंद दिनों के बाद ही लड़की पक्ष ने तरह-तरह की बातें कर युवक पक्ष को परेशान करना शुरू कर दिया। महिला भी बात-बात पर लड़के पक्ष के साथ बदतमीजी करते हुए उनको जेल भिजवाने की धमकी देती है। बहू से परेशान लड़के वालों ने कई बार लड़की पक्ष से वार्ता भी की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। करीब एक सप्ताह पहले पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के बाद बहू के घरवाले उसे अपने साथ मेरठ ले गये और इस संदर्भ में बाद में बातचीत करने की बात कही।

लड़के वाले इंतजार कर रहे थे की लड़की पक्ष से लोग वार्ता के लिये आयेंगे मगर बीते शनिवार को बहू खुद ससुराल पहुंच गयी। मगर घर में ताला लगा था और बुजुर्ग सास-ससुर वहां नहीं थे। घर के बाहर बैठी बहू को देखकर अपार्टमेंट वालों ने उन्हें सूचना दी तो ससुर ने बहू से अपने माता-पिता को साथ लेकर आने को कहा। मगर घर के अंदर जाने की जिद करते हुए बहू बाहर बैठी रही। सूचना पर पहुंची पुलिस के समझाने के बावजूद बहू ने एक न मानी। अगले दिन बहू ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर घर का ताला तोड़ा और अंदर कुंडी लगाकर बैठ गयी। बुजुर्ग सास-ससुर ने पुलिस को सूचना दी मगर लड़की ने घर का दरवाजा नहीं खोला। पुलिस भी बिना ठोस कार्रवाई के वापस चली गयी।

किसी अनहोनी की आशंका के चलते अपार्टमेंट वालों ने घर का दरवाजा तोड़कर अंदर देखा तो वहां सारा सामान बिखरा हुआ था और कीमती सामान भी गायब था। अंदर के हालात बता रहे थे कि गद्दों में भी आग लगाने की कोशिश की गयी है। वहीं घर के अंदर विवाहिता सबसे बेफिक्र बैठी थी। पीड़ित सास-ससुर के पास बहू के घरवालों के आने का इंतजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा और वह फिक्रमंद हैं।

इस प्रकरण में एक ओर जहां बहू की दबंगई के कारण बुजुर्ग दंपति को परेशान किये जाने का मामला है वहीं पुलिस भी कोई ठोस कार्रवाई न करने पर सवालों के घेरे में है। यह सही है कि महिला हितों की रक्षा करनी चाहिये मगर ताला तोड़कर घर में घुसकर बैैठ जाना भी तो उचित नहीं है। यदि बहू घर के अंदर कोई गलत कदम उठा ले तो क्या पुलिस उसकी जिम्मेदारी लेगी। क्या मान लिया जाये कि कानून सिर्फ महिलाओं की रक्षा के लिये हैं और बुजुर्गों के जान-माल की रक्षा करना पुलिस का दायित्व नहीं है। या इस मामले को लेकर पुलिस पर कोई बाहरी दबाव बनाया जा रहा है जिसके चलते वह अवैधानिक रूप से घर का ताला तोड़कर घर में घुसने वाली महिला के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही।

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