- पांडव, भीम ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर की थी पूजा
- पॉल्यूशन रहित होने से इस क्षेत्र में जीव जंतुओं की प्रजनन दर बढ़ी
बीहड़ का नाम सुनते ही जेहन में डाकुओं की तस्वीर उभर आती है. डाकुओं की कहानियां याद आ जाती है. लेकिन ठेठ बीहड़ जिनकी सीमा दो प्रदेशों यूपी और मध्यप्रदेश से मिलती है का एक सकारात्मक पहलू भी है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. औरैया, इटावा, जालौन और भिंड की सीमा पर पचनद यानी पांच नदियों का तीर्थस्थल है. यह पांच नदियां यमुना, चंबल, क्वारी, सिंदौर, पहुंज नदियों का संगम है.कहा जाता है की पांडव भीम ने शिवलिंग स्थापित कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी. वर्तमान में यहां एक बहुत बड़ा शिव मंदिर है जहां देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आकर पचनद में स्नान कर भगवान शिव की आराधना करते हैं. आइए पढ़े पर्यावरणविद दीपक विश्नोई से बातचीत पर आधारित एक रिपोर्ट…
चंबल नदी का पानी साफ
पर्यावरणविद दीपक विश्नोई ने बिजनेस बाइट्स को बताया कि चंबल नदी का पानी बहुत साफ है. इसलिए यहां घड़ियालों और मगरमछ को आसानी से देखा जा सकता है.कभी-कभी मगरमच्छ तलहटी से बाहर आ जाते हैं और अपने अंडे यहां पर करते हैं. जानकारों की माने तो पचनद से इटावा के चकनगर तक घड़ियाल देश में सबसे ज्यादा यहीं पाए जाते हैं.अकेले इस क्षेत्र की चंबल नदी में 300 से ज्यादा घडि़याल हैं. हाल ही में एक मादा घड़ियाल ने 240 घड़ियालों को जन्म दिया है.इनके डर से सामान्य लोग चंबल के इस किनारे पर नहीं आते हैं.

महाभारत काल के अवशेष मौजूद
दीपक विश्नोई का कहना है कि पचनद नदी का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है.महाभारत काल के अवशेष यहां मौजूद है. यहां का वातावरण बहुत ही शुद्ध है.जरूरत है इस क्षेत्र के विकास करने की.उन्होंने कहा कि जलीय जंतुओं को बचाना विकास के दौरान प्राथमिकता होनी चाहिए.राजस्थान से यहां पानी और छोड़ा जाना चाहिए.
कालेश्वर मंदिर जहां भीम, पांडव ने की आराधना
कालेश्वर मंदिर जहां भीम, पांडव ने की आराधना की थी. यहां दर्शन करने बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं. बकासुर का वध यहां हुआ था. इसलिए यहां बकेवर भी है. सौंदर्य से भरपूर प्रकृति का आनंद यहां देखते ही बनता है. लेकिन यदि इस क्षेत्र में जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो हम प्रकृति का सौंदर्य समेटे इस क्षेत्र को हमेशा के लिए खो देंगे.
चंबल नदी में पानी का बहाव कम हो रहा
दीपक विश्नोई ने ये भी बताया की चंबल नदी बहाव लीन पीरियड यानी ग्रीष्म काल और शीत ऋतु में गिरता जा रहा है.इसका मुख्य कारण यह है कि मध्यप्रदेश में कई स्थानों पर पानी की आपुर्ति के लिए चंबल नदी के पानी का यूज हो रहा है. जलीय जंतुओं के लिए मिनिमन इनवायरमेंट फ्लो जो आवश्क होता है वो धीरे-धीरे कम हो रहा है. चंबल नदी में कितना इनवायरमेंट फ्लो होना चाहिए इसके लिए स्टडी की जाए और उसी के मुताबिक कोटा बैराज से चंबल नदी में पानी छोड़ा जाना चाहिए.

