मौत के सरकारी आंकड़ों पर कैसे करे विश्वास
शाहवेज खान
मेरठ में कोरोना की दूसरी लहर ने किस कदर तबाही मचाई है इस मंजर की दासता शमशान घाट और कब्रिस्तान में आने वाली लाशें साफ बयान कर रही है। हालांकि सरकारी आंकड़े इस खोफ जदा मंज़र को भी झूठा साबित करने में कोई कसर नही छोड़ रहे है वही कब्रिस्तान की मिट्टी में पन्नी में लिपटी लाशें और श्मशान घाट में जलती चिताए यह बताने के लिए काफी है कि प्रशासन जरूर कोई खेल कर रहा है जिसकी पर्दा दारी प्रशासन के लिए लाजमी हो रही है । सरकारी आंकड़ों में प्रतिदिन करोना से मरने वाले मरीजों की संख्या को बेहद कम दर्शाया जा रहा है जबकि श्मशान घाट और कब्रिस्तान में अपने मुर्दे को लाने वाले कुछ और बयान कर रहे हैं बुधवार को भी सूरज कुंड श्मशान घाट में चिताओं का अंबार देखने को मिला। जगह जगह उम्मीद की किरण भी चिताओं में जलती हुई दिखाई दी। अपनो को खोने का गम और परिवार वालो के आंसू खुले आसमान के नीचे साफ बोलते हुए दिखे की यह सब सिस्टम के मारे है। जिन्हें सुनने वाला भी कोई नही। श्मशान घाट में इतनी भीड़ देखने को मिली की अपने सगो का अंतिम संस्कार करने आए लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और लम्बे इंतजार के बाद लोगो को चिताओ को जलाने का मौका मिला। वही दोपहर 2:00 बजे के बाद भीड़ को देख चिताओं को श्मशान घाट के गेट के पास भी जलाया गया जिससे वहीं आसपास के लोग भी नाराज दिखाई दिए उनका कहना है कि अब बिल्कुल सड़क के पास चिता जलाई जा रही हैं श्मशान घाट में जरा भी जगह नहीं बची है ऐसा होने से उन लोगों को भी करोना का खतरा बना हुआ है जो लोग श्मशान घाट से मिले हुए अपने मकानों में रहते है । वही श्मशान घाट के नजारे को देखने के बाद प्रशासन के कोरोना मरीजों के मौत के दावे भी झूठे नजर आ रहे हैं और यह बात साफ हो गई है कि कुछ तो है जिसकी प्रशासन पर्दा दारी कर रहा है ।
एक के बाद एक जलती रही चिताए
बुधवार को सुबह से ही सूरज कुंड श्मशान घाट में एक के बाद एक चिताए जलती हुई दिखाई दी कि मुख्य द्वार यानी साइकल स्टैंड के पास भी चिताओ को जलाना पड़ा। साथ ही गेट के ठीक सामने भी चिताओं को जलाया गया । जिसके बाद वहां की स्तिथी भी किसी से देखी नही गई। शमशान घाट के पुरोहित का कहना है कि श्मशान में इतने शव आ रहे हैं की लोगो को इंतज़ार करना पड़ रहा है। क्यों कि जगह भी नही बच रही। उनका कहना था कि उन्होंने अपने जीवन के दौर में ऐसा मंज़र कभी नहीं देखा जहां एक के बाद एक चिताए जलानी पड़ रही है।
सरकारी आंकडे, जमीनी हकीकत से दूर
मेरठ में जिस तरीके से लोग करोना का शिकार हो रहे हैं और सरकारी आंकड़ों में वे मौतें कहीं भी दर्शाई नहीं जा रही है इससे यह साफ जाहिर हो रहा है कि सरकारी आंकड़े जमीनी हकीकत से बहुत दूर हो चले है। अब या तो सरकार इन आंकड़ों को छुपाना चाहती है या फिर प्राइवेट अस्पतालों में होने वाली मौत व घरों में उपचार के दौरान खत्म होती सांसो का हिसाब सरकार के पास नहीं है। लेकिन जिस तरीके से स्वास्थ्य विभाग प्रतिदिन आंकड़ों को पेश कर रहा है उस पर अब जनता का कोई विश्वास नजर नहीं आ रहा है लोगों का मानना है कि सरकारी विभाग अपने आंकड़ों को दुरुस्त करने के लिए लाशों के ढेर को भी नकार रहे हैं जिससे लोगो का सरकार के प्रति विश्वास टूट रहा है।

