कानपुर में पकड़ी गयी अब तक की सबसे बड़ी कर चोरी

उत्तर प्रदेशकानपुर में पकड़ी गयी अब तक की सबसे बड़ी कर चोरी

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कानपुर में पकड़ी गयी अब तक की सबसे बड़ी कर चोरी

  • 13 मुखौटा कम्पनियों में खपाये 121 करोड़
  • देश भर के 16 ठिकानों पर छापेमारी

कानपुर। कर चोरी के मामले में आयकर विभाग की कानपुर टीम को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। शहर के दो पशु आहार निर्माता समूह और एक चिटफंड कम्पनी पर अब तक का सबसे बड़ी कर चोरी पकड़ी है। तीनों समूहों के ठिकानों पर शुक्रवार को भी छापेमारी जारी रही। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने 13 मुखौटा कम्पनियों को पकड़ा है।

जिनके जरिये पशु आहार निर्माताओं ने 121 करोड़ रुपये खपाया था। साथ ही आरती चिटफंड में लगा करोड़ों रुपयों का कोई सोर्स नहीं मिल पा रहा है। आयकर विभाग कानपुर की टीम ने पशु आहार बनाने वाले समूहों पर शिकंजा शुक्रवार को भी कसा रहा।

देशभर के 16 ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी जारी रही। विभाग की टीम ने छापेमारी के दौरान 121 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी है। जो कि अब तक कानपुर में सबसे बड़ी कर चोरी का मामला है। विभाग ने समूहों के निदेशकों द्वारा बनायी गयी 13 मुखौटा कम्पनियों को पकड़ा है। यह 13 मुखौटा कम्पनियों के जरिये अघोषित आय को घोषित आय बनाने में उपयोग में लाया करते थे।

आयकर विभाग के उच्च पद्स्थ सूत्रों के मुताबिक निदेशकों ने अब तक 13 कम्पनियों के जरिये 121 करोड़ रुपये पशु आहार कम्पनियों में लगाये थे। मुखौटा कम्पनियों के जरिये निदेशकों ने 121 करोड़ रुपयों को कर्ज के रूप में दिखाया था। जिससे वह आयकर विभाग में भी भारी छूट उठा रहे थे। यह सभी मुखौटा कम्पनियां दिल्ली और कोलकाता के पतों पर पंजीकृत थी। विभाग के मुताबिक यह सभी कम्पनियां केवल कागजातों में चल रही थी।

जब कि जमीनी स्तर पर कम्पनियों को कोई वजूद नहीं था। यहीं नहीं आयकर के सामने यह कम्पनियां तब आयीं जब इनसे करोड़ों रुपयों का कर्ज दिखाया गया। लेकिन इन कम्पनियों का कोई रिटर्न नहीं जमा किया जा रहा था। इसके बाद इन कम्पनियों के दर्ज पतों पर भी कोई कम्पनी का सुराग नहीं मिला। वहीं दूसरी ओर आरती चिटफंड कम्पनी में लगा करोड़ों रुपयों का कोई सोर्स आयकर विभाग को नहीं मिल पा रहा है।

विभाग के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक अगर आरती चिटफंड कम्पनी में करोड़ों रुपयों का निवेश किया गया। लेकिन निवेशकों की जानकारी कम्पनी के निदेशक नहीं दे पा रहे है। अगर निवेशकों की जानकारी नहीं मिल पाती है तो कम्पनी में लगाये गयी राशि को कालाधन माना जायेगा। अब तक की छापेमारी में आयकर की टीमों ने एक करोड़ 30 लाख रुपये कैश बरामद किया है।

जबकि 52 लाख रुपये की डायमंड और सोने की ज्वैलरी भी बरामद की है। कैश और ज्वैलरी को आयकर विभाग ने सीज कर लिया है। कम्पनी निदेशक और परिवार के सदस्य ज्वैलरी और कैश की जानकारी अभी तक नहीं दे पाये है। घरों से सात बैंक लॉकर की जानकारी भी मिली है। जिसकों आयकर विभाग ने सीज करवा दिया है। हालांकि सीज किये गये लॉकरों को लॉकरों को छापेमारी खत्म होने के बाद खोला जायेगा। इसके साथ ही टीमों ने कम्पनी के निदेशकों के घरों से दो दर्जन से अधिक सम्पत्ति के कागजात बरामद किये है। जानकारों ने बताया कि इससे पहले कानपुर में कर अपवंचना के मामले में अधिकतम सरेंडर राशि 87 करोड़ रुपये रही है। 121 करोड़ रुपये की कर अपवंचना का मामला पकडऩा कानपुर आयकर विभाग के लिये एक रिकॉर्ड होगा।

ड्राइवर को बनाया सेल कम्पनी का निदेशक
आयकर विभाग के छापे में पकड़ी गयीं 13 मुखौटा कम्पनियों के निदेशक में एक ड्राइवर भी है। आयकर विभाग की टीम लगातार ड्राइवर से पूछताछ कर रही है। छापे में ड्राइवर के नाम से 11 बैंक खातों के कागजात भी बरामद हुए है। जिनकी जानकारी आयकर विभाग बैंकों से जुटा रहा है। पशु आहार बनाने वाली दोनों समूहों के निदेशक मुखौटा कम्पनियों के जरिये करोड़ों रुपये की अघोषित आय को घोषित आय बनाने और करोड़ रुपयों का टैक्स बचाने के लिये उपयोग कर रहे थे।

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