मेरठ। वीवो मोबाइल कंपनी(Vivo Mobile) के 13 हजार से अधिक मोबाइल एक ही आईएमईआई नंबर पर चलाने का मामला केंद्र तक पहुंच गया है। इससे कंपनी पर जहां कानूनी शिकंजा कसेगा वहीं कंपनी के अधिकारियों की भी मुश्किलें बढ़ सकती है। वीवो कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। वीवी कंपनी के इस फर्जीवाड़े के खुलने के बाद अब मामले में नए सिरे से पुलिस ने चार्जशीट तैयारी की है। जिससे वीवो कंपनी की मुश्किलें बढ़ेगी। मुकदमे के बाद कंपनी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसेगा और कार्रवाई शुरू होगी। इस मामले की जांच टेलीकॉम मिनिस्ट्री भी करेगी। इसकी रिपोर्ट तैयार कर पुलिस ने नए सिरे से गृहमंत्रालय को भेजने की तैयारी की है।
बता दें कि एडीजी आफिस में तैनात दारोगा आशाराम की तहरीर पर गत 5 जून 2020 को थाना मेडिकल में वीवो कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में वीवो कंपनी के एक ही आईएमईआई नंबर पर 13500 से अधिक मोबाइल चलते पाए गए।
इसकी विवेचना के लिए तत्कालीन एसएसपी ने नौचंदी थाने के पूर्व इंस्पेक्टर आशुतोष कुमार को सौंपी थी। जिस पर उन्होंने केस की गंभीरता को नहीं समझा और पूरे मामले में कंपनी और उसके अधिकारियों को फायदा पहुंचाते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इंस्पेक्टर ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस डायरी को कोर्ट में जमा भी करा दी। एफआर में तर्क दिया कि साफ्टवेयर में तकनीकी खराबी के कारण ही एक आईएमईआई पर ये सभी मोबाइल चलते पाए गए हैं।
विवेचक ने एक इसी लाइन को आधार बनाकर विवो कंपनी को भी क्लीनचिट दे दी। इस मामले में तकनीकी खराबी के संबंध में विवो कंपनी के सीईओ से इस संबंध में किसी से बात नहीं की गई।
