टिहरी। गंगा नदी पर बने टिहरी झील में बनाए गए फ्लोटिंग हट्स से निकलने वाली गंदगी को लेकर प्रशासनिक तंत्र ने आंख बंद कर ली है। एसडीएम की जांच में मिली तमाम खामियों के बाद भी प्रशासन कंपनी ली राय के ऊपर मेहरबान बना हुआ है। आज भी फ्लोटिंग हट्स के शौचालयों की गंदगी को धडल्ले से भगीरथी में गिराया जा रहा है। जबकि फ्लोटिंग हट के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़े हुए हैं।
फ्लोटिग हट का संचालन करने वाली कंपनी ली राय ने यहां के सीवर निस्तारण के लिए कर्मचारियों को कोई उपकरण भी नहीं मुहैया कराए हैं। जांच रिपोर्ट में खामिया पाए जाने के बाद टिहरी झील में फ्लोटिंग हट्स का संचालन जारी है। इस पूरी जांच रिपोर्ट को दरकिनार कर फ्लोटिंग हट्स को बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एनओसी और पर्यटन विभाग के रजिस्ट्रेशन के बगैर संचालन हो रहा है।
टिहरी झील में पीपीपी मोड में संचालित फ्लोटिंग हट्स का निरीक्षण एसडीएम अपूर्वा सिंह ने अपनी टीम के साथ किया था। एसडीएम ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में लिखा था कि फ्लोटिंग हट के रसोई से गंदा पानी झील में गिराया जा रहा है। फ्लोटिग हट का एसटीपी प्लांट खराब मिला है। फ्लोटिग हट के बीस काटेज से लगभग 10 हजार लीटर सीवर का पानी निकलता है। लेकिन, जिस बोट में उसे एसटीपी तक ले जाने की व्यवस्था है वह मात्र दो हजार लीटर की ही है।
जांच टीम ने यह भी लिखा कि एसटीपी के निरीक्षण से लगता है कि एसटीपी का संचालन किया ही नहीं जाता है। जांच में फ्लोटिंग हट्स प्रबंधन दोषी पाया गया है। इसके बावजूद भी उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने दोबारा निरीक्षण किए बिना 18 अक्टूबर को जिला प्रशासन को भेजे पत्र में फ्लोटिंग हट्स को संचालन की अनुमति के निर्देश दिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी अभी तक फ्लोटिग हट प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

