अमित बिश्नोई
गुवाहाटी की तरह इंदौर में भी रनों की बारिश हुई, यह अलग बात है कि ये बारिश दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों की तरफ से हुई जो पहले ओवर से आखरी ओवर तक चली. बरसे भारतीय बल्लेबाज़ भी, पर लगता है कि आज बड़ी जल्दी में थे जैसे उन्हें कहीं और जाना हो और इसीलिए वो जल्दी जल्दी यहाँ का काम ख़त्म करना चाह रहे थे और फिर जल्दी का काम तो शैतान का होता ही है, भारतीय बल्लेबाज़ों पर भी शैतान हावी हो गया. पहले ही ओवर से जो आया उंसने सिर्फ बल्ला घुमाया। एक ओवर में दो दो छक्के, दो दो चौके मारकर भी उनका दिल नहीं भर रहा था, आज ऐसा लग रहा था कि पहले नंबर से लेकर आखरी नंबर का बल्लेबाज़ सिर्फ चौके और छक्के ही मारने आया था, नतीजा वहीँ हुआ कि 20 ओवर भी पूरे नहीं खेल सके और श्रंखला का अंत 49 रनों की बड़ी हार से किया। अब टी 20 विश्व कप के लिए 6 अक्टूबर को रवानगी के साथ ये हार भी अपने साथ ले जानी होगी।
हार हो या जीत कोई बड़ी बात नहीं, मुकाबला होगा तो एक ही जीतेगा मगर देखने वाली बात ये होती है आपका इन्टेंट क्या है. माना कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपनी धरती पर पहली बार टी 20 श्रंखला आपने जीती, माना कि पिछले मैच में आपने दक्षिण अफ़्रीकी गेंदबाज़ों की ज़बरदस्त धुनाई की मगर आप शायद यह भूल गए कि गुवाहाटी में धुनाई तो उन्होंने भी बहुत की थी और उस सिलसिले को उन्होंने इंदौर में भी बरकरार रखा. गुवाहाटी में मिलर ने सैकड़ा ठोंका तो इंदौर में राइली रूसो ने उस सिलसिले को आगे बढ़ाया।
दरअसल शृंखला में पंत हों , कार्तिक हों या लोअर मिडिल आर्डर के बल्लेबाज़ रहे हों पहली बार बल्लेबाज़ी का पूरा मौका मिला था, मैच में के एल राहुल और कोहली को आराम दिया गया था. पंत को सलामी के लिए भेजा गया था. कार्तिक पांचवें नंबर पर आये थे। कप्तान रोहित शर्मा और श्रंखला में पहली बार खेल रहे श्रेयस अय्यर सस्ते में आउट हो चुके थे. इसका मतलब पंत और कार्तिक के पास गेंदे ही गेंदें थी, मैच को काफी आगे ले जाने का मौका भी था. माना कि हर ओवर में 11 रनों की ज़रुरत थी मगर इन दोनों का पेट तो 15-20 के ओवर से भी नहीं भर रहा था. पंत जिस ओवर में सस्ते ढंग से आउट हुए 20 रन बना चुके थे, कार्तिक जिस ओवर में घटिया ढंग से आउट हुए 14 रन बन चुके थे. ऐसा लग रहा था जैसे यह दोनों 10-12 ओवरों में मैच को ख़त्म करना चाहते हों. पंत ने 27 और कार्तिक ने 46 रन भले ही बनाये हो लेकिन उन्होंने दिखा दिया कि वो स्लॉग ओवरों के लिए ही ज़्यादा फिट हैं, उनको ज़्यादा गेंदें रास नहीं आतीं। सिर्फ यही दोनों ही नहीं बाकी आने वाले बल्लेबाज़ भी इसी मूड में नज़र आये, जैसे उनसे कहा गया हो कि “जा सिमरन जा जी ले अपनी ज़िन्दगी”.
माना कि 2-0 की बढ़त के बाद इस मैच का वो रोमांच नहीं था, आपके पास नए खिलाडियों को मौका देने का समय था और वो आपने दिया भी. बात सिर्फ इतनी है जब इन खिलाडियों को बल्लेबाज़ी का पूरा मौका मिला तो उस अवसर को इन लोगों ने भुनाया नहीं। पंत को सोचना होगा कि गेंदबाज़ बड़ा नहीं होता, गेंद बड़ी होती है, गेंदबाज़ का सम्मान भले ही न करो, गेंदों का तो करो. टी-20 क्रिकेट में अपेक्षाकृत उनकी नाकामी की शायद यही वजह है, उनपर हमेशा गलत शॉट खेलकर आउट होने का आरोप लगता रहा है जो अबतक सही भी साबित हुआ है. परेशानी की बात यह है कि वो सबक सीखना ही नहीं चाहते। जहाँ तक दिनेश कार्तिक की बात है तो मैं ऐसा समझता हूँ कि उनको टीम इंडिया में जो भूमिका दी गयी है उन्होंने अपने दिमाग़ में उसे बिठा लिया है. वो अब आठ दस गेंदों की बल्लेबाज़ी को ध्यान में रखकर ही मैदान में उतरते हैं, इंदौर में उन्हें 21 गेंदे मिल गयी शायद वो उन्हें हज़म नहीं हुई.
आखिर में सिर्फ एक ही बात हार हार होती है और जीत जीत. रिकॉर्ड में सब दर्ज होता है. यह श्रंखला भारत की जीत के साथ दर्ज होगी लेकिन 2-1 से न कि 3-0 से. ऐसा हो सकता था. जीत की भूख को कभी ख़त्म नहीं करना चाहिए। शृंखला का आखरी मैच जीत और दो मैचों में लगातार 200+का स्कोर और दो बल्लेबाज़ों के सैकड़े और डिकॉक की फॉर्म में वापसी दक्षिण अफ्रीका के लिए विश्व कप में काफी कारआमद साबित हो सकती है.
