देहरादून – देवभूमि उत्तराखंड में आपको भगवान शिव के कई धार्मिक स्थल मिलेंगे इन्हीं धार्मिक स्थलों में एक टपकेश्वर महादेव मंदिर भी है जहां आपको प्राकृतिक और मानव निर्मित वास्तुकला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में टोंस नदी के तट पर स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर को महाभारत काल से जोड़ा जाता है. भगवान भोलेनाथ के इस गुफा मंदिर में शिवलिंग पर पानी की बूंदे लगातार गिरती रहती हैं यही कारण है कि शिव के इस मंदिर को टपकेश्वर महादेव मंदिर कहा जाता है. सावन के महीने में मंदिर में दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से यहां आते हैं.
धार्मिक मान्यताएं
देवभूमि उत्तराखंड में महाभारत और रामायण से जुड़े भगवान शंकर के कई प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं. टपकेश्वर महादेव मंदिर भी इन धार्मिक स्थलों में से एक है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शंकर ने यहां देवताओं को देवेश्वर के रूप में दर्शन दिए थे. एक अन्य मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों और कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य ने एक पाव पर खड़े रहकर भगवान शंकर की तपस्या की थी. कहा जाता है कि इस तपस्या के प्रताप से उनके यहां अश्वत्थामा ने जन्म लिया था. मान्यता यह भी है कि अश्वत्थामा के जन्म के बाद उनकी मां उन्हें दूध नहीं मिला पा रही थी जिस पर भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना के बाद गुफा की छत पर गाय के थन उत्पन्न हो गए और दूध की धारा बहने लगी. इसी कारण से भगवान शिव को दूधेश्वर नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि कलयुग के समय में दूध की यह धारा अब पानी के रूप में बहती है.
5151 रुद्राक्ष से ढके शिवलिंग
टपकेश्वर महादेव मंदिर गुफा में दो स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है जिन्हें ढकने के लिए 5151 रूद्राक्ष का इस्तेमाल किया गया है मंदिर की वास्तुकला प्राकृतिक और मानव निर्माण का अद्भुत संगम है मंदिर दो पहाड़ियों के बीच स्थित मंदिर परिसर में मौजूद खूबसूरत झरने यहां आने वाले श्रद्धालुओं का आकर्षण का केंद्र होते हैं

