एडिलेड : भारत के मेलबोर्न मिशन के लिए एडिलेड का मैदान तैयार, यहीं से वह रास्ता निकलता है जो 15 साल के सूखे को ख़त्म कर सकता है. एडिलेड का मौसम बहुत साफ़ है और ड्राई है , बेशक यह मौसम भारतीय गेंदबाज़ों के लिए अनुकूल है. एडिलेड के रिकार्ड्स भी भारत के पक्ष में हैं, मैदान का मौसम भी भारतीय है क्योंकि स्टेडियम में आज हर तरफ नीला नीला ही नीला नज़र आने वाला है. इस नीले समंदर में मेन इन ब्लू आज अपना जलवा दिखाएंगे और मेलबोर्न का टिकट कटायेंगे।
मैदान का डायमेंशन और भारतीय गेंदबाज़ी
बात एडिलेड के मैदान की तो यहाँ के मैदान का डायमेंशन टीमों के लिए बड़ी समस्या हमेशा रहता। साइड की सीमा रेखा काफी छोटी होने की वजह से गेंदबाज़ी करना काफी मुश्किल हो जाती है, विशेषकर स्पिनर्स बल्लेबाज़ों के निशाने पर आ जाते हैं. सूर्या और रोहित शर्मा जैसे बल्लेबाज़ों को तो ऐसे डायमेंशन बहुत भाते हैं लेकिन जहाँ तक गेंदबाज़ी का सवाल है तो यही डायमेंशन चिंता का विषय भी है. भारत अभी तक दो स्पिनर्स के साथ मैदान में गया है लेकिन इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी को देखते हुए यह रणनीति भारी भी पड़ सकती है. ऐसे में क्या टीम इंडिया एक अतिरिक्त पेसर के साथ मैदान में जाएगी। हालाँकि कल हर्षल पटेल ने नेट्स पर काफी गेंदबाज़ी की. सुनील गावस्कर का भी मानना है कि एडिलेड के डायमेंशन को देखते हुए हर्षल पटेल एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं.
पाकिस्तान के फाइनल में पहुँचने से दबाव में भारत
गावस्कर का मानना है कि इंग्लैंड की टीम से निपटना आसान काम नहीं, वहीं वह यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान के फाइनल में पहुँचने से टीम इंडिया पर अतिरिक्त दबाव आ गया है. पूरे देश की अब यही ख्वाहिश है कि पाकिस्तान फाइनल में पहुंचा है तो भारत को भी हर हाल में फाइनल में पहुंचना चाहिए और फाइनल में उसे एकबार फिर धूल चटाना चाहिए, लेकिन गावस्कर साथ ही यह सलाह भी देते हैं कि भारत को अभी फाइनल के बारे में नहीं सोचना चाहिए। उसके सामने अभी एकमात्र लक्ष्य इंग्लैंड को हराना है और उसे उसी पर पूरी तरह केंद्रित रहना चाहिए। फाइनल में क्या करना है इसको सोचने के लिए भारत को पूरे दो दिन मिलेंगे. उसे बाबर और शाहीन के बारे में नहीं बल्कि बटलर और स्टोक्स के बारे में सोचना होगा.
