सीएम के जिले में सिस्टम की मौत

उत्तर प्रदेशसीएम के जिले में सिस्टम की मौत

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सीएम के जिले में सिस्टम की मौत

मोहल्ले वालों ने भी मुंह मोड़ा, श्मशान घाट में खुद ही सजाई चिता, किया अंतिम संस्कार
कोरोना पाॅजिटिव आने के बाद भी स्वास्थ विभाग ने नहीं ली कोई सुध

सुनील शर्मा

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर में रविवार को पुष्पावती देवी के साथ सिस्टम की मौत हो गयी। दुखद यह है कि यह हुआ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद में जहां से वह लगातार पांच बार सांसद का चुनाव जीते हैं। बतौर यूपी का मुख्यमंत्री होने के नाते सीएम योगी गोरखपुर जिले पर विशेष निगाह रखते हैं। इसके बावजूद एक कोरोना संक्रमित महिला की मौत बिना उपचार के हो जाना नाकाम और मर चुके सिस्टम की बानगी पेश करता है।

गोरखपुर जिले के गोला कस्बे के वार्ड संख्या-5 में रहने वाली 55 वर्षीय पुष्पावती देवी बीती आठ अप्रैल को कस्बे से गयी तीर्थ दर्शन बस में सवार होकर हरिद्वार गयीं थीं। उनके साथ बस में 54 यात्री और भी सवार थे जिन्होंने हरिद्वार में कुंभ स्नान किया। 16 अप्रैल को बस हरिद्वार से वापस लौटी तो कुछ यात्रियों की तबियत खराब होने पर तहसील प्रशासन ने सभी यात्रियों को कोरोना जांच करायी। पुष्पावती देवी समेत नौ यात्री कोरोना संक्रमित मिलने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें 14 दिन तक होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी थी। शुक्रवार शाम से होम आइसोलेशन में रह रही पुष्पावती देवी की जांच करने या उन्हें दवा देने तक कोई नहीं आया और रविवार सुुबह उन्होंनेे दम तोड़ दिया।

सिस्टम की नाकामी तो देखिये की कोरोना मरीज की मौत के बावजूद स्वास्थ विभाग से कोई कर्मी वहां नहीं पहुंचा। वहीं कोरोना से मौत होने के कारण मोहल्ले वालों ने भी मुंह मोड़ लिया। थककर पुष्पावती देवी के बेटे ने चेहरे पर मास्क लगा और हाथों ने ग्लव्स पहन कर अपनी मां के शव को ठेले पर लादा और गोला स्थित मुक्तिधाम पर पहुंच गया। बिना किसी की मदद लिये उसने अकेले ही चिता सजाई और मां का अंतिम संस्कार कर दिया। कोरेाना मरीज के शव के अंतिम संस्कार के दौरान भी कोविड प्रोटोकाल के तहत जिम्मेदार विभाग का कोई नहीं पहुंचा।

अब मामला सामने आने पर अधिकारी मामले की जांच कराने और लापरवाही बरतने वाली टीम को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कर रहे हैं। मगर क्या एक महिला जो स्वास्थ विभाग से मिलने वाले उपचार की बाट जोहती रही और शायद उसे इलाज मिल जाता तो उसका जीवन बच भी सकता था। मगर कोरोना संक्रमित की पूरी जानकारी होने के बावजूद मरीज की इलाज के अभाव में हुई मौत के मामले में क्या गैर इरादतन ही सही हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाना चाहिये। कानूनन इस बात पर पक्ष और विपक्ष हो सकते हैं मगर स्वास्थ विभाग किसी गंभीर मरीज को जो सिर्फ स्वास्थ विभाग सहारे है और विभाग उसे राम के सहारे छोड़ देेता हैं तो ऐसे कर्मचारियों को भी तत्काल नौकरी से निकाल राम के सहारे कर देना चाहिये। सवाल यह है कि क्या सीएम योगी ऐसा कर पायेंगे, क्या सिस्टम की मौत उन्हें जगा पायेगी या यह मानवशा को शर्मसार करने वाली घटना एक दिन की खबर बन कर रह जायेगी।

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