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दिलों पर राज करती थीं सुषमा स्वराज…

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दिलों पर राज करती थीं सुषमा स्वराज…

सुनील शर्मा

सात बार संसद सदस्य, तीन बार विधान सभा सदस्य, भारत की विदेश मंत्री, दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री यह आंकड़ें किसी के राजनीतिक जीवन की सार्थकर्ता को प्रदर्शित करने के लिये काफी हैं। लेकिन जिसका स्व-राज लोगों के दिलों पर चलता था उसके जीवन का परिचय देने में यह पदनाम नाकाफी हैं। क्योंकि सुषमा स्वराज का राज लोगों के दिलोें पर चलता था। लोगों की पीड़ा को अन्र्तमन से महसूस कर उनकी समस्याओं को दूर करनेे का हरसंभव प्रयास करने वाली सुषमा स्वराज ने विपक्षी दलों के साथ दुनिया भर के लोगों की सराहना हासिल की। विश्व भर में मौजूद भारतीय नागरिकों की समस्याओं को हल करने के उनके जज्बे से प्रभावित होकर प्रसिद्ध अखबार वाॅशिंगटन पोस्ट ने सुषमा स्वराज को ‘सुपर माॅम ऑफ द स्टेट’ की संज्ञा दी थी। भाजपा के तेज-तर्रार नेता के रूप में ख्याति हासिल करने वाली सुषमा स्वराज की वाक-पटुता के कायल विपक्षी दल भी थे और जब वह बोलती थीं तो सभी उनकी बातों को ध्यान से सुनते थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद सुषमा स्वराज को बीजेपी के सबसे उत्कृष्ट वक्ताओं में माना जाता था। हिंदी और अंग्रेजी पर समान अधिकार रखने वाली सुषमा स्वराज ऊर्दू भाषा की भी अच्छी जानकार थी जिसके कायल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी थे।

सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर

सुषमा स्वराज ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गईं। 1973 में सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट के वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। 1977 में मात्र 25 साल की आयुु में सुषमा को हरियाणा में देवीलाल मंत्रिमंडल में श्रम और रोजगार मंत्री का पद दिया गया। सिल्क की साड़ी पर जैकेट पहनने वाली छोटे कद की सुषमा एक दिन भारतीय राजनीति में सितारा बनकर चमकेंगी इस बात की कल्पना उस वक्त शायद ही किसी ने की होगी। 1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो सुषमा को उनके मंत्रिमंडल में सूचना और प्रसारण मंत्री बनाया गया। 2009 में सुषमा स्वराज काो लालकृष्ण आडवाणी की जगह लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में सुषमा स्वराज को भारत की विदेश मंत्री बनाया गया। सुषमा स्वराज, पहली बार भारत के विदेश मंत्री का पद संभालने वाली इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला थीं जो विदेश मंत्री बनीं। सुषमा स्वराज 2006 से 2009 तक इंडो-इजराइल संसदीय मैत्री समूह की अध्यक्षा भी रहीं। सुषमा स्वराज को 13 अक्टूबर 1998 से दिल्ली के 5 वें मुख्यमंत्री और पहली महिला मुख्यमंत्री चुना गया। उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी की उन्हें सात बार संसद सदस्य के रूप में और तीन बार विधान सभा के सदस्य के रूप में चुना गया था। सोनिया गांधी के सामने चुनाव लड़ने वाली सुषमा स्वराज ने बहुत कम समय में कन्नड़ सीख कर बेल्लारी के मतदाताओं का मन जीत लिया था। उस समय एकतरफा लग रहे मुकाबले को सुषमा ने अपनी प्रचार शैली से बहुत करीबी बना दिया। अपने सफल राजनीतिक करियर के बीच 2019 में उन्होंने खराब स्वास्थ्य के चलते चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। 6 अगस्त 2019 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

लोगों की मदद कर ‘सुपर माॅम ऑफ द स्टेट’ बनीं

सुषमा स्वराज का राजनीतिक जीवन बेहद सफल रहा। मगर उनको विश्वभर में ख्याति बतौर विदेश मंत्री कार्य करते हुुए मिली। विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान विश्व भर में फैले भारतीय नागरिकांे की मदद कर उन्होंनेे मिसाल कायम की। बचपन से ही मूक-बधिर गीता साल 2000 के दौरान गलती से समझौता एक्सप्रेस पर चढ़कर पाकिस्तान पहुँच गई थीं। गीता के बारे में जानकारी मिलने के बाद सुुषमा स्वराज अपने प्रयासों से 2015 में गीता को वापस भारत ले आईं। गीता के माता-पिता को तलाश कराने वाली सुषमा स्वराज गीता के लिये माता-पिता ही बन गयीं। सऊदी अरब, यमन, दक्षिणी सूडान, इराक और यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय मजदूरों के भारत लौटने में सुषमा स्वराज ने उनकी मदद की। बात चाहे हनीमून पर जाने वाली महिला के पासपोर्ट खोने की हो या बांग्लादेश के एक अनाथलय में रह रहे 12 साल के बच्चे को भारत वापस लाने की, सुषमा स्वराज प्रत्येक व्यक्ति की मदद को तैयार रहती थीं। सिर्फ एक ट्वीट पर सुषमा मदद करने में जुट जाती थीं। उनके मानवीय पहलू से प्रभावित वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें ‘सुपर माॅम ऑफ द स्टेट’ की संज्ञा दी।

भारत में ही कराया किडनी ट्रांसप्लांट

एक ओर जहां भारत के नेता किसी भी बीमारी का इलाज कराने के लिये विदेश जाने को प्राथमिकता देते हैं वहीं सुषमा स्वराज ने अपना किडनी ट्रांसप्लांट भारत में ही कराने का निर्णय लिया। उनके पति स्वराज कौशल के अनुसार सुषमा ने उस वक्त कहा था, यदि मैं अपने इलाज के लिये विदेश गयी तो लोगों का भारत के डाॅक्टर्स से भरोसा उठ जायेगा। यह देशहित की बात है, मैं अपना इलाज देश में ही कराऊंगी। 2016 में एम्स में उनका किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा और उन्होंने चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया। सुषमा स्वराज के इस उदाहरण ने लोगों का भरोसा भारतीय चिकित्सकों पर स्थापित किया।

नवाज शरीफ की मां ने लिया सुषमा स्वराज से वादा

विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर गयीं तो नवाज शरीफ की मां ने उन्हें देखते ही गले लगा लिया। अमृतसर की मूल निवासी नवाज शरीफ की मां ने भरे गले से सुषमा स्वराज से कहा, -‘तू मेरे वतन से आई है, वादा कर कि रिश्ते ठीक करके जाएगी’। पाकिस्तान से वापस लौटते हुए सुषमा स्वराज ने नवाज शरीफ की बेटी मरियम से कहा था, ‘अपनी दादी को बता दीजिएगा कि मैंने पाकिस्तान से रिश्ते बेहतर करने का वादा निभा दिया है’ यह था एक भरोसा जो दो देशों के बीच खींची दुश्मनी की तलवार के बावजूद कायम था। बतौर विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान से संबंध बेहतर करने की दिशा में सार्थक प्रयास भी किये।

पद छोड़ते ही खाली कर दिया सरकारी आवास

राजनीतिक दलों के नेता चुनाव हार जाने या पद से हट जाने के बावजूद सरकारी आवास खाली करने को तैयार नहीं होते। कई मामलों में तो नेताओं से सरकारी आवास खाली कराने के लिये कोर्ट को आदेश देने पड़े। मगर नैतिकता की पक्षधर सुषमा स्वराज ने 2019 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले खराब स्वास्थ्य के कारण चुनाव न लड़ने का फैसला किया। अपना पद छोड़ने के चंद दिनों के अंदर सुषमा स्वराज ने सरकारी आवास खाली कर निजी मकान में रहना शुरू कर दिया था।

भारतीय राजनीति में सुषमा स्वराज एक ऐसी नेता रहीं जो विपक्षी दलों में भी लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब रहीं। उनकी वाक-पटुता, मधुर व्यवहार और मानवता ने उनसे मिलने और उन्हें जानने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित किया। भारतीय राजनीति में सुषमा स्वराज का नाम सदैव आदर के साथ लिया जायेगा। जीवनपर्यंत देशहित में सोचने वाली सुषमा स्वराज ने 6 अगस्त 2019 को अपने निधन से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने पर बधाई दी और ट्वीट किया कि प्रधान मंत्री जी – आपका हार्दिक अभिनन्दन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।

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