सुप्रीम कोर्ट ने CBSE- ICSE की नंबर स्कीम को बताया सही और वाजिब बताया

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सुप्रीम कोर्ट ने CBSE- ICSE की नंबर स्कीम को बताया सही और वाजिब बताया

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE और CICSE बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षा रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार और बोर्ड दोनों ही छात्रों को लेकर चिंतित हैं. इसलिए परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई या आईसीएसई परीक्षा रद्द करने के फैसले को किसी की व्यक्तिगत अवधारणा से तय नहीं किया जा सकता. ये बड़े जनहित में लिया गया फैसला था. हम प्रथम दृष्टया सरकार के इस फैसले से सहमत थे.

एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सीबीएसई कह रहा है कि कम्पार्टमेंट की परीक्षाएं 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच आयोजित की जाएंगी, जबकि आईआईटी कानपुर के एक अध्ययन से पता चलता है कि तीसरी लहर सितंबर में आएगी. एम्स का भी कहना है कि वायरस का एक और वर्जन 3 सप्ताह में आ सकता है.

इस पर जस्टिस एमएम खानविलकर ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा कि “अगर इम्प्रोवमेंट और कंपार्टमेंट के छात्रों की संख्या कम है तो क्या 31 जुलाई तक लिखित परीक्षा नहीं कराई जा सकती? आप ऐसे छात्रों से एक हफ्ते में संपर्क करने के लिए बोलिए, तब अगस्त के पहले हफ्ते में परीक्षा कराई जा सकती है.” जवाब देते हुए एजी वेणुगोपाल ने बताया कि सरकार 15 अगस्त तक कंपार्टमेंट एग्जाम कराने पर विचार कर रही है.

कोर्ट ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि चूंकि दूसरे संस्थान लिखित परीक्षा आयोजित कर रहे हैं तो सीबीएसई को भी करनी चाहिए. सीबीएसई बोर्ड ने व्यापक जनहित में परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है.

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बता दें कि याचिकाकर्ता की ओर से विकास सिंह ने कहा था कि अगर परीक्षा करना संभव नहीं है तो पहले ही छात्रों को ये विकल्प दिया जाना चाहिए था कि वो लिखित परीक्षा देना चाहते हैं या सीबीएसई या ICSE की इंटरनल मार्किंग स्कीम चुनना चाहते हैं.

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