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केजरीवाल को स्पेशल ट्रीटमेंट के आरोप को सुप्रीम कोर्ट ने किया ख़ारिज

rahul gandhi

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कोई छूट नहीं दी गई है, जिन्हें लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में अस्थायी जमानत दी गई थी।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि वह अपने फैसले के किसी भी “महत्वपूर्ण विश्लेषण” का स्वागत करती है।

शीर्ष अदालत ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक की अंतरिम जमानत से संबंधित बयानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केजरीवाल के वकील के दावों और जवाबों पर विचार करने से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा, हमने अपने आदेश में वही कहा जो हमें उचित लगा। हमने किसी के लिए कोई अपवाद नहीं बनाया।

ED के प्रतिनिधि के रूप में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जेल से रिहा होने के बाद केजरीवाल द्वारा दिए जा रहे भाषण पर आपत्ति जताई। कहा गया मतदाताओं से केजरीवाल कह रहे थे कि अगर वो आम आदमी पार्टी और विपक्षी गठबंधन इंडिया के लिए वोट करेंगे तो उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा।

पीठ ने मेहता से कहा, ”यह उनकी धारणा है, इसमें हम कुछ नहीं कह सकते।” केजरीवाल को अस्थायी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को उन्हें जमानत दे दी और 2 जून को आत्मसमर्पण करने को कहा।

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को अब खत्म हो चुकी शराब नीति मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। रिहाई के तुरंत बाद केजरीवाल चुनाव प्रचार में उतर गए और पीएम मोदी पर चौतरफा हमला बोल दिया।

गौरतलब है बुधवार को एक साक्षात्कार में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “नियमित फैसले” के रूप में नहीं देखते हैं और कहा कि देश में कई लोग मानते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को “स्पेशल ट्रीटमेंट ” दिया गया था।

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