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Money Laundering Law: मनी लांड्रिंग एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ईडी के पक्ष में निर्णय

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन आफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट के विभिन्न प्रावधानों की वैधता को बरकरार ही रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट को एफआईआर के साथ नहीं जोड़ा जा सकता और ईसीआईआर प्रवर्तन निदेशालय का आंतरिक दस्तावेज है। आरोपी को ईसीआईआर की आपूर्ति अनिवार्य नहीं और गिरफ्तारी के दौरान कारणों का खुलासा करना काफी है।
अदालत ने पीएमएलए अधिनियम की धारा 45 में जमानत के लिए दो शर्तों को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निकेश थरचंद शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संसद 2018 में उक्त प्रावधान में संशोधन करने के लिए सक्षम थी। बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बताई खामियों को दूर करने के लिए संसद इस समय धारा 45 में संशोधन करने के लिए सक्षम है।

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कोर्ट ने माना कि ईडी अधिकारी ‘पुलिस अधिकारी’ नहीं हैं और इसलिए उनके द्वारा दर्ज किए गए बयान संविधान से प्रभावित नहीं हैं, जो अपराध के खिलाफ मौलिक अधिकार की गारंटी देता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट को एफआईआर के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। यह केवल ईडी का एक आंतरिक दस्तावेज है। 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला  तैयार है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रखा था। जिन्होंने ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है उन लोगों में कार्ति चिदंबरम और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने जांच शुरू करने और समन शुरू करने की प्रक्रिया की अनुपस्थिति समेत कई मुद्दों को उठाया था।

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