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जोखिम के बीच हुआ सफल गुर्दा प्रत्यारोपण


जोखिम के बीच हुआ सफल गुर्दा प्रत्यारोपण

मेरठ। न्यूटीमा हॉस्पिटल में पिछले 3 वर्षो से लगातार गुर्दा रोग से पीड़ित मरीजों का गुर्दा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जा रहा था तथा इससे पूर्व दुसरे हॉस्पिटल मैं महामारी काल से पूर्व तक लगभग 100 सफल गुर्दा प्रत्यारोपण किये जा चुके हैं। इस कड़ी में गत 20 मार्च को न्यूटीमा हॉस्पिटल में किया गया था। कोरोना वैश्विक महामारी के चलते 23 मार्च एवं इसके बाद की सभी तिथिओं में गुर्दा प्रत्यारोपण नहीं हो सके थे।

चूँकि गुर्दा मरीजों की खराब हालत के चलते इतने लम्बे समय तक डायलिसिस पर रखना जोखिम भरा था। अत: सीएमओ से अनुमति लेकर एक गुर्दा प्रत्यारोपण गत 28 जून एवं एक गुर्दा प्रत्यारोपण गत 5 जुलाई को सफलतापूर्वक किया गया। गुर्दा रोगियों के नाम क्रमश: गुर्दा प्राप्तकर्ता वीरसिंह गुर्दादाता डालचंद (भाई-भाई)एवं गुर्दा प्राप्तकर्ता अशिका गुर्दादाता रफीकुल इस्लाम (पिता-पुत्री) है।


डा. शालीन शर्मा व डा. शरतचन्द्र गर्ग ने बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण प्रक्रिया में गुर्दा प्रत्यारोपण टीम को बहुत अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ा। जिसमें मरीज के परिवार के सभी सदस्यों का कोरोना टेस्ट करना एवं साथ में रहने वाले सदस्यों को आइसोलेट किया गया। जिसके लिए तीन माह के लिए हॉस्पिटल के पास उनके रहने की व्यवस्था करायी गयी एवं सभी सदस्यों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया ताकि सभी सदस्य कोरोना एवं दूसरे संक्रमणों से स्वयं का बचाव कर सके।
गुर्दा प्रत्यारोपण के दौरान डॉ संदीप गर्ग, डॉ शालीन शर्मा, डॉ शरतचंद्र गर्ग, डॉ अवनीत राणा, डॉ सारिका, डॉ श्वेता गर्ग एवं बाकि सभी प्रत्यरोपण टीम के सदस्यों द्वारा पीपीई किट पहन कर सर्जरी की गयी।

चिकित्सकों के अनुसार बताया कि हम सभी टीम के सदस्यों ने पीपीई किट पहन कर ही सर्जरी की इस दौरान गुर्दा प्राप्तकर्ता मरीज का पेशाब आना कम हो गया था। ऐसे में तब डॉ. संदीप कुमार गर्ग के नेतृत्व में टीम द्वारा किये गए प्रयासों से मरीज की हालत में सुधार हुआ एवं पूर्ण रूप से ठीक होने पर अब मरीज की हॉस्पिटल से छुट्टी कर दी गयी है।

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