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Chandrayaan-3 mission: चंद्रयान-3 की सफलता से प्राइवेट सेक्टर भरेगा उड़ान, ISRO दे रहा रफ्तार

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Chandrayaan-3 mission: चंद्रयान-3 मिशन की सफलता से अंतरिक्ष क्षेत्र की स्टार्टअप कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा। 2020 में मात्र 21 कंपनियां अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रही थीं। लेकिन अब इनकी संख्या 146 तक पहुंच गई है। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक इन्हें बढ़ावा देने के लिए सरकार अंतरिक्ष के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ाने की योजना बना रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) निजी क्षेत्र में technology transfer को रफ्तार देने में मददगार साबित हो रहा है।

चंद्रयान-3 लॉच करने से पहले ISRO की वाणिज्यिक शाखा इन-स्पेस (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन एवं प्राधिकरण केंद्र) ने लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) तकनीक को निजी क्षेत्र को सौंपने के लिए disinterest पत्र (EoI) मांगे थे। किसी प्रक्षेपण यान तकनीक को निजी क्षेत्र के साथ साझा करने का यह पहला मौका है। इसरो 1980 से अब तक 235 उद्योगों को 400 से अधिक प्रौद्योगिकी दे चुका है। सूत्रों का कहना है ऐसी करीब 200 तकनीक पिछले कुछ साल में दी गई हैं।

मकसद निजी क्षेत्र को सहारा देना

इसरो और प्राइवेट सेक्टर के बीच काम करने वाली इन-स्पेस (In-SPACe) के चेयरमैन पवन गोयनका का कहना है कि हम निजी क्षेत्र को प्रौद्योगिकी देने का काम तेजी से कर रहे हैं। इन-स्पेस इसमें समन्वय का काम कर रही है। कुछ दिन पहले SSLV की प्रौद्योगिकी देने की घोषणा की है। हम करीब नौ या दस प्रमुख तकनीक पर भी विचार कर रहे हैं। जिसका मकसद निजी क्षेत्र को सहारा देना है।’
गोयनका ने कहा, हाल में अंतरिक्ष नीति की घोषणा होने से इस काम को बढ़ावा मिलेगा। सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए FDI नीति तैयार करने की योजना बना रही है। जिससे स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा। योजना के मुताबिक सब-सिस्टम विनिर्माण, प्रक्षेपण यान परिचालन और उपग्रह संचालन, स्थापना जैसे क्षेत्रों में एफडीआई की अनुमति होगी।

अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की बढ़ती रुचि

चंद्रयान-3 मिशन से अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की बढ़ती रुचि का पता चल रहा है। LVM-3 रॉकेट करीब 85 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र से आया। इसकी महत्त्वपूर्ण प्रणालियां GOCO मॉडल के तहत बनाई थीं। उद्योग का अनुमान है कि अंतरिक्ष में 146 स्टार्टअप के अलावा 1,500 से ज्यादा सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (MSME) काम कर रहे हैं। इस क्षेत्र को जून 2020 में निजी क्षेत्र के लिए खोला था। तब से अंतरिक्ष क्षेत्र में करीब 17.5 करोड़ डॉलर का निवेश हो चुका है। अभी तक अंतरिक्ष क्षेत्र में कुल 25.8 करोड़ डॉलर का निवेश आ चुका है। जिन कंपनियों को विदेशी निवेश मिला, उनमें स्काईरूट, अग्निकुल, ध्रुव और पिक्सेल इत्यादी शामिल हैं। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से इसमें तेजी आने की उम्मीद है।

गोयनका ने कहा कि इसरो के लिए इसका मकसद कमाई नहीं है। हम निजी क्षेत्र के अधिक से अधिक हिस्से को अंतरिक्ष क्षेत्र से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए शुरुआत महंगी होगी। इसरो के कार्यक्रम से काम आसान होगा। इसरो क्षमता निर्माण कार्यक्रम कार्यालय (CBPO) के निदेशक एन सुधीर कुमार का कहना है कि ISRO ने काफी तकनीक विकसित की हैं। जो अंतरिक्ष ही नहीं बल्कि दूसरे उद्योगों के लिए उपयो​गी हैं। वैज्ञानिक संगठन के लिए ये तकनीकी हस्तांतरण सामान्य बात है।

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