कृषि कानून के विरोध में भाकियू ने जलाईं बिल की प्रतियां
मेरठ। केंद्र सरकार द्वारा लाये गये कृषि कानूनों के खिलाफ आज भाकियू ने मेरठ-सहारपुर मंडल के जिलो में जोरदार प्रदर्शन किया। मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बागपत और सहारनपुर में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया। भाकियू ने बिल की प्रतियां फाड़कर-जलाकर अपना विरोध प्रकट करते हुए कृषि कानून लागू न होने देने का ऐलान किया।
भारतीय किसान यूनियन केंद्र सरकार द्वारा लायेे गये नए कृषि कानून का विरोध कर रही है। पांच जून को कृषि कानूनों के लागू हुए एक वर्ष पूरा होने पर शनिवार को मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों में भाकियू कार्यकर्ताओं ने बिल की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया। मेरठ में भाकियू पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट पर कृषि कानून की प्रति फाड़ कर विरोध किया। वहीं वहीं मवाना तहसील और सिवाया टोल पर बिल की प्रतियां फूंक डाली।
शामली में कृषि बिल व बकाया गन्ना भुगतान न होने के विरोध में किसानों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और बिलों की प्रतियां जलाई। बागपत में भाकियू ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर कृषि तीनों कृषि कानूनों की छाया प्रतियों को फाड़कर फेंकी। तीनों कृषि कानून रद करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने की मांग कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी अधिकारियों को दिया गया। मुजफ्फरनगर में अपनी मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने एसडीएम सदर के कार्यालय पर प्रतियां फूकीं। कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़पें होने से माहौल कुछ देर के लिये तनावपूर्ण हो गया।
भाकियू ने मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों में प्रदर्शन कर कृषि कानून विरोध को और तेज कर दिया है। भाकियू नेेताओं का कहना है कि किसानों को बकाया गन्ना भुगतान नहीं मिल रहा है। बिजली के बिलों में मनमानी की जा रही है और किसानों के बिल बढ़कर आ रहे है। किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाने से बच्चों की शिक्षा, शादियों और परवरिश को लेकर मुश्किलें सामने आ रही हैं। लेकिन सरकार को इसकी जरा भी परवाह नहीं है। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब आंदोलन को और तेज किया जायेगा।

