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शेयर बाजार में गिरावट, अडानी समूह के शेयर टूटे

adani group

बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स सुबह गिरावट के साथ खुले। मगर सूचकांकों से ज़्यादा गिरावट अडानी ग्रुप के शेयरों में देखि जा रही है. अडानी ग्रुप की आठ कंपनियों में डेढ़ प्रतिशत से लेकर 6 प्रतिशत से ज़्यादा तक की गिरावट देखी जा रही. सबसे ज़्यादा गिरावट अडानी टोटल गैस, अडानी पावर और अडानी एंटरप्राइसेस में देखी जा रही है. बता दें कि शनिवार को हिंडनबर्ग ने एक नई रिपोर्ट जारी की जिसमें आरोप लगाया गया था कि सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच ने अदानी समूह की फर्मों में अनियमितताओं की उचित जांच नहीं की होगी, क्योंकि अदानी के अधिकारियों द्वारा पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए गए उन्हीं फंडों में निवेश करने से हितों के टकराव की संभावना है। इस रिपोर्ट के बाद यही अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि सोमवार को शेयर बाज़ार में गिरावट आएगी और अडानी ग्रुप के शेयर सबसे ज़्यादा टूटेंगे।

बाजार नियामक सेबी और माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने आरोपों का खंडन किया है, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में किए गए दावों का विस्तृत खंडन जारी किया है। सेबी ने यह भी पुष्टि की है कि अध्यक्ष ने हर समय उचित खुलासे किए थे।

माधबी बुच और धवल बुच ने कहा कि उन्होंने अडानी संस्थाओं में कोई निवेश नहीं किया है। उन्होंने कहा कि निवेश कोष के सलाहकार के रूप में धवल की नियुक्ति पर ब्लैकस्टोन को माधबी की सेबी से अलग होने की सूची में जोड़ा गया था, उन्होंने कहा कि माधबी द्वारा स्थापित दो परामर्श फर्म सेबी में उनकी नियुक्ति पर निष्क्रिय हो गईं।

सेबी ने अपनी ओर से हिंडनबर्ग के आरोपों का खंडन किया कि रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) विनियमों में संशोधन का उद्देश्य ब्लैकस्टोन जैसे प्रमुख वित्तीय समूहों को लाभ पहुंचाना था। नियामक ने कहा कि उसने भारतीय प्रतिभूति बाजार को आगे बढ़ाने के लिए आरईआईटी, एसएम आरईआईटी, इनविट और म्यूनिसिपल बॉन्ड आदि की भूमिका को लगातार उजागर किया है।

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