Sports News: अंतरार्ष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के इस जिले की है धाक, भामाशाह पार्क में क्रिकेट का ककहरा सीख कइयों ने छू लिया आसमान

 
international circet team

मेरठ। मेरठ को स्पोर्ट्स सिटी के नाम से जाना जाता है। विश्व में कहीं भी मेरठ का नाम आए तो इसकी पहचान यहां के बने क्रिकेट बैट और अन्य स्पोर्टस सामान विश्व स्तर पर देश की पहचान कराते  हैं।  लेकिन अब मेरठ मेरठ को क्रिकेट की नर्सरी भी कहा जाने लगा है। पिछले एक दशक से मेरठ के क्रिकेट सितारे विश्व क्रिकेट पटल पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। यहां के क्रिकेट खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर तिरंगे को लहराया है। मेरठ के भामाशाह पार्क से क्रिकेट का ककहरा सीखने वाले खिलाड़ी आज विश्व में मेरठ की पहचान बना रहे हैं। भामाशाह पार्क ने देश को कई अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर दिए है। इस भामाशाह पार्क पर क्रिकेट का ककहरा सीखकर प्रवीण कुमार भारतीय टीम के पीके बने। इसी भामाशाह मैदान से क्रिकेट की एबीसी सीखकर भुवनेश्वर कुमार इंडियन क्रिकेट टीम के भुवी बन गए। इसी मैदान की मिटटी में कर्ण शर्मा ने अपना पसीना बहाया और अंतराष्ट्रीय स्तर पर मुकाम हासिल किया। इसके और भी उदाहरण हैं जैसे प्रियम गर्ग और कार्तिक त्यागी। मेरठ की इसी जमी से क्रिकेट सीखने की बुनियाद रखने वाले प्रियम गर्ग जहां विश्व कप अंडर 19 क्रिकेट टीम के लिए भारतीय टीम के कप्तान रहे तो वहीं कार्तिक त्यागी भी टीम का हिस्सा बने। दोनों ही दिग्गजों ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में भी नाम कमाया है।

इसी भामाशाह के क्रिकेट मैदान में किसी ज़माने में राहुल द्रविड़ और युवराज सिंह ने भी चौके छक्के लगाए हैं।. इस मैदान को आज देश के होनहार क्रिकेटर रोज अपना पसीना बहाते हैं और एक दिन अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपना और देश का नाम रोशन करेंगे। देश के क्रिकेट के लिए ये भामाशाह मैदान विश्व स्तरीय खिलाडियों के जन्म की प्रतीक्षा कर रहा है। भवनेश्वर कुमार और वर्तमान में प्रियम गर्ग और कार्तिक त्यागी के बाद नवोदित क्रिकेटर खुद को सफल बनाने के लिए इस ग्राउंड में प्रतिदिन पसीना बहा रहे है। इंटरनेशनल खिलाड़ी देने वाले मेरठ के इस खेल के मैदान ने देश की झोली में कई अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भारतीय टीम में डाले हैं। इस क्रिकेट के मैदान में आज तक जिस खिलाड़ी ने लगन और निष्ठा के साथ पसीना बहाया उसे उसका फल ज़रुर मिला है। मेरठ के भामाशाह क्रिकेट मैदान को क्रिकेट खिलाड़ियों की कर्मस्थली भी माना जाता है।

इसी ग्राउंड से ही खेलकर क्रिकटे का एबीसीडी सीखने वाले निर्देश ने मेघायल की टीम की तरफ से खेलते हुए नागालैण्ड की टीम के सारे विकेट एक ही पारी में चटका दिए. इस ख़तरनाक बॉलिंग स्पेल के बाद निर्देश की तुलना क्रिकेट लीजेंड अनिल कुंबले से की जाने लगी. वाकई में ये ग्राउंड सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. इस ग्राउंड के सफलता की गाथा जारी है. उम्मीद है कि इस रणजी सेशन में भी कुछ और धुरंधर निकलेंगे जो भारतीय टीम के लिए मील का पत्थर साबित होंगे और इस ग्राउंड की गाथा चलती रहेगी.