Virat Kohli: विराट होने की भी एक सीमा होती है

एशिया कप तो इस बार टी 20 फॉर्मेट में खेला जा रहा है लेकिन जहाँ तक विराट के शतकों की बात है तो ऐसा किये हुए उन्हें ढाई से भी ज़्यादा का समय हो चूका है.
 
विराट

तौक़ीर सिद्दीक़ी 
 

विराट कोहली वह खिलाड़ी हैं जो अपनी सकारात्मकता के लिए, शारीरिक और मानसिक फिटनेस के लिए जाने जाते हैं शायद इसलि उन्हें मास्टर ऑफ़ चेंजेज़ कहा जाता है. विराट ने ऐसे बेशुमार मैचों में भारत को जीत दिलाई है जब भारत ने लक्ष्य का पीछा किया है और इनमें से बहुत से ऐसे मैच हैं जिनमें विराट ने अकेले दम पर लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को जीत तक पहुँचाया है, दरअसल विराट को लक्ष्य का पीछा करना पसंद है और लक्ष्य का पीछा करना उन्हीं बल्लेबाज़ों को अच्छा लगता है जो मानसिक रूप से बहुत मज़बूत होते हैं, जो दबाव से घबराते नहीं बल्कि और निखरते हैं लेकिन जैसा की हर खिलाड़ी का अपने जीवन में एक बुरा दौर होता है, इस समय के उनके दौर को बुरा ही कहा जा सकता है और विराट कोहली ने अब इस बात को स्वीकार भी कर लिया कि हाँ वह इस समय मानसिक दबाव से गुज़र रहे हैं. 

दूसरे इंसानों की तरह वह भी दबाव में आते हैं और इस समय वो मानसिक तौर पर थकावट का शिकार हैं. विराट इन दिनों आराम कर रहे हैं और अब कल पाकिस्तान केखिलाफ 41 दिनों बाद वह एकबार फिर मैदान में उतरने वाले हैं. विराट ने माना कि पिछले 10 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि उन्होंने एक महीने तक बल्ले को छुआ भी नहीं। एशिया कप तो इस बार टी 20 फॉर्मेट में खेला जा रहा है लेकिन जहाँ तक विराट के शतकों की बात है तो ऐसा किये हुए उन्हें ढाई से भी ज़्यादा का समय हो चूका है. पिछले छह महीनों से उनके बल्ले से एक भी पचासा नहीं निकला है. विराट को इन सब बातों का एहसास है और वह पूरी कोशिश कर रहे हैं इस मुश्किल घड़ी से निकलने के लिए. दुबई में अभ्यास सत्र के दौरान उन्हें पसीना बहाते देखा जा सकता है लेकिन साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि उनकी बल्लेबाज़ी रंग अभी फीका ही है. नेट बोलर्स उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं, कोहली के बल्ले से मनचाहे शॉट्स नहीं निकल रहे हैं. यह सब उनकी इस मानसिक थकावट की बात पर मुहर लगाते हैं. 

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लेकिन इसके बावजूद कोहली का कद बहुत विराट है, टीम में उनकी मौजूदगी ही विरोधी टीमों की नींद उड़ा देती है, उन्हें ख़ास तौर पर विराट के लिए स्ट्रेटेजी बनानी पड़ती है. BCCI के चीफ और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का कहना कि विराट को वापसी करना आता है, उनके पास रन बनाने के कई फॉर्मूले हैं, उनके बारे में ज़्यादा चिंतित होने की ज़रुरत नहीं, उन्हें मालूम है की उन्हें क्या करना है. दादा की बात सच है क्योंकि पाकिस्तान को अगर किसी एक भारतीय खिलाडी से सबसे ज़्यादा खौफ है तो वह हैं विराट, पाकिस्तान के खिलाफ उनका रिकॉर्ड भी इस बात की पुष्टि करता है.

कुछ लोग भले ही विराट की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए आशंका ज़ाहिर कर रहे हैं लेकिन क्रिकेटर के लिए फॉर्म एक ऐसी चीज़ है जो सिर्फ एक अच्छी पारी से वापस आ सकती है और हो सकता है वह पारी 28 अगस्त को कोहली के बल्ले से निकले। वैसे कोहली ने इस इंटरव्यू में कहीं न कहीं क्रिकेट की अधिकता की बात भी स्वीकार की।  विराट ने कहा कि शरीर उनसे थोड़ा रुकने के लिए कह रहा था लेकिन कभी कभी आप अपने दिमाग की बात को नहीं मानते। विराट ने कहा कि अच्छा होता कि मैं अपने दिमाग़ की बात को मान लेता। विराट ने कहा कि मेरी पहचान दिमागी तौर पर एक मज़बूत व्यक्ति के रूप में है जोकि मैं हूँ मगर मेरी भी एक सीमा है और सीमा को मैंने पहचानने में ग़लती की.