208 की भी रक्षा न हो सकी!

हार्दिक पटेल हों या यजुवेंद्र चहल या फिर सबसे बढ़कर भुवनेश्वर कुमार जिनका 19 वां अब क्रिकेट का एक नया टर्म बन गया है
 
t20 world cup score
अमित बिश्‍नोई

हालाँकि टी20 फॉर्मेट ऐसा है जहाँ पर कोई भी स्कोर सुरक्षित नहीं कहा जाता लेकिन जब मैच घरेलू मैदान और कंडीशंस में हो तो माना जाता है कि 200+ का स्कोर विंनिंग टोटल है लेकिन मोहाली में ऐसा नहीं हुआ. भारतीय टीम के दिए गए 209 रनों के लक्ष्य को मौजूदा टी 20 विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया ने आसानी के साथ  4 विकेट से पार कर लिया, हालाँकि मैच अंतिम ओवर में ज़रूर पहुंचा लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने उसे कभी अपने से दूर जाने नहीं दिया। अगर अक्षर पटेल को छोड़ दें तो भारतीय आक्रमण की पोल खुलती नज़र आयी. दो साल बाद टी-20 में वापसी करने वाले उमेश यादव हों या फिर चोट से उबरकर वापस आये हर्षल पटेल। हार्दिक पटेल हों या यजुवेंद्र चहल या फिर सबसे बढ़कर भुवनेश्वर कुमार जिनका 19 वां अब क्रिकेट का एक नया टर्म बन गया है, मज़ाक बनने लगा है 19वीं ओवर का, लोग मीम्स बनाने लगे हैं, पूछने लगे हैं कि 18 वे के बाद क्या सीधा 20वां ओवर नहीं डाला सकता। 

बात पहले भारतीय गेंदबाज़ी की हो जाय, तो शुरुआत भुवनेश्वर कुमार से ही करते हैं, एशिया कप का सिलसिला भारत में जारी है और साथ ही जारी है उनकी वाइड गेंदे फेंकने की रफ़्तार भी. आखिर के दो ओवरों में वो आजकल सामने वाली टीम के टोटल को बढ़ाने में पूरा सहयोग कर रहे हैं, चौके-छक्के खाकर भी और अतिरिक्त रन देकर भी. भुवनेश्वर ने अपने चार ओवरों में पचासा पार कर लिया था. उमेश कुमार यूँ तो टी 20 में आईपीएल को छोड़कर बहुत कम ही नज़र आते हैं, लम्बे अरसे बाद उन्हें टीम में मौका मिला जिसे वो भुना नहीं पाए, दो ही ओवर गेंदबाज़ी भी उनको मिली, शायद रोहित तीसरा ओवर देने की हिम्मत नहीं जुटा पाए. एशिया कप से बाहर रहे हर्षल पटेल को पूरे चार ओवर मिले और अपनी फिफ्टी लगाने से वो एक रन से चूक गए, चहल की गेंदबाज़ी भी आजकल टहलती हुई नज़र आ रही है. एशिया कप में काफी रन लुटाने के बाद घर में भी उनकी दरियादिली जारी है, 21 गेंदें डालकर मात्र 42 रन ही दिए, मतलब हर गेंद पर दो रन. हार्दिक पंड्या ने भी रन लुटाये मगर उन्हें माफ़ी इसलिए कि बंदा वैसे भी छठा विकल्प है मतलब मुख्य गेंदबाज़ नहीं। छठा विकल्प कभी चलता है तो कभी नहीं. एकमात्र गेंदबाज़ जिसने कंगारुओं को अपनी ऊँगली पर नचाया, अक्षर पटेल रहे, साबित भी किया कि रविंद्र जडेजा की जगह सही खिलाड़ी चुना गया है. चार ओवर 17 रन तीन विकेट, इससे बेहतर गेंदबाज़ी और क्या हो सकती है. 

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बल्लेबाज़ी की बात करें तो हार्दिक ने एकबार फिर सबका ह्रदय जीत लिया, विशुद्ध टी-20 पारी खेली, उनसे ऐसी ही पारियों की उम्मीद की जाती है और अक्सर वो निराश नहीं करते हैं, उनका ये अंदाज़ विश्व कप में बरकरार रहा तो भारत का सालों से चला आ रहा खिताबी सूखा समाप्त भी हो सकता। सूर्या कुमार ने फिर दिखाया क्यों उन्हें टीम इंडिया का भविष्य कहा जा रहा है, क्यों उन्हें ABD का जानशीन कहा जाता है, वो जब क्रीज़ पर होते हैं तो गेंदबाज़ को भी पता नहीं होता कि छक्का सामने पड़ने वाला या विकेट के पीछे। सूर्या जबतक क्रीज़ पर होते हैं दर्शकों का पैसा वसूल मनोरंजन होता है. उपकप्तान राहुल की 55 रनों की पारी ने सलामी जोड़ी पर पिछले कुछ दिनों से हाय तौबा मचाने वालों को जवाब ज़रूर दिया होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब ये लोग कोहली कोहली चिल्लाना बंद करेंगे। विराट कोहली और रोहित शर्मा को अभी भी कुछ बड़ी पारियों की ज़रुरत है. दिनेश कार्तिक को पंत पर प्रेफर किया गया लेकिन वो अपनी कैमियों की भूमिका नहीं निभा सके. विश्व कप से पहले अभी उन्हें और मौके ज़रूर मिलेंगे अपने को पंत से बेहतर साबित करने के लिए क्योंकि विश्व कप में दोनों में से कोई एक ही खेलेगा ये बात तय है. 

ऑस्ट्रेलिया की क्या बात करें क्योंकि जो जीता वही सिकंदर। कैमरून ग्रीन और वेड का ज़िक्र ज़रूर करना चाहूंगा। पिछले एशिया कप में वेड ने अपने आप को साबित किया था, शाहीन के ओवर में तीन छक्के वो भी एक ही स्टाइल में एक ही पोजीशन पर उनकी पहचान बन गए, मोहाली में भी उन्होंने उसी तरह की बल्लेबाज़ी की. टी-20 फॉर्मेट में ग्रीन ने अपनी परफॉरमेंस से ग्रीन सिग्नल दे दिया है, विश्व कप में वो ऑस्ट्रेलिया के लिए एक एसेट साबित हो सकते हैं. आखिर में यही कहूंगा कि इस बात को याद रखिये कि भारतीय टीम में आज जितने भी गेंदबाज़ खेले सब टी 20 विश्व कप स्क्वाड का हिस्सा हैं, विश्व कप से पहले ये घरेलु सीरीज़ वार्म अप मैचेज की तरह है और टीम में शामिल खिलाडियों के लिए एक तरह से इम्तेहान भी जिसके पहले पेपर में अक्षर को छोड़ बाकी सभी गेंदबाज़ फेल हो गए हैं, खैर अभी पांच पेपर बाकी हैं और उन्हें अच्छे से देने की ज़रुरत है.