सेलेक्टर्स की सोच, ऑस्ट्रेलिया को UAE समझ बैठे

टीम पर नज़र डालते ही मेरा पहला  रिएक्शन यह था कि क्या विश्व कप भी एशिया कप की तरह यूएई में हो रहा है
 
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अमित बिश्‍नोई

 

ऑस्ट्रेलिया में अक्टूबर में होने वाले टी 20 विश्व कप के लिए BCCI ने टीम के 15 मुख्य और 4 रिज़र्व खिलाडियों के नामों का एलान कर दिया है. टीम पर नज़र डालते ही मेरा पहला  रिएक्शन यह था कि क्या विश्व कप भी एशिया कप की तरह यूएई में हो रहा है क्योंकि टीम में गेंदबाज़ों की लाइन अप को देख कर तो यही लगता है. टीम में 140+ का सिर्फ एक ही गेंदबाज़ है और वो है जसप्रीत बुमराह, बाकी तो सब मीडियम पेसर ही हैं. आप सोच रहे होंगे कि क्या नकारात्मक तरीके से बात की शुरुआत की है लेकिन नकारात्मक ही सही लेकिन यह बात बिलकुल सही है कि ऑस्ट्रेलियाई पिचों के देखते हुए भारत के तेज़ आक्रमण को कतई सही नहीं ठहराया जा सकता। चलिए हम अपनी बात के समर्थन में कुछ तर्क रखते हैं जो हो सकता है आपको न पसंद आएं लेकिन एक विश्लेषक के नाते हमें मैच के साथ साथ चुनी गयी टीम का भी विश्लेषण करना चाहिए। 

गेंदबाज़ी का ज़िक्र आगे ज़रूर करेंगे लेकिन बात पहले शुरू से शुरू करते हैं यानि बल्लेबाज़ी से. सेलेक्टर्स के लिए यहाँ पर सबसे आसान चॉइस थी , कोई माथापच्ची नहीं, टॉप फोर में फिलहाल किसी की इंट्री बनती ही नहीं विशेषकर कोहली और राहुल दोनों के फॉर्म में आने के बाद तो बिलकुल भी नहीं। उसके बाद आने वाली बैटिंग में सिर्फ एक स्लॉट बचता है, सेलेक्टर्स ने उसके लिए विकेट कीपर के रूप में ऋषभ पंत नेचुरली चुना है, तो उसके बाद हुड्डा और दिनेश कार्तिक के लिए फाइनल इलेविन में जगह ही नहीं बनती है. टीम इंडिया 6 बोलिंग ऑप्शंस के साथ ज़्यादातर मैदान में उतरती है. ऐसे में हार्दिक पंड्या टीम के लिए संतुलन का काम करते हैं. अब छठा प्योर बैट्समैन तभी अंदर आ सकता है जब हार्दिक या किसी एक गेंदबाज़ को न खिलाया जाय जिसकी सम्भावना बहुत कम है क्योंकि टूर्नामेंट का इस बार फॉर्मेट ही कुछ ऐसा कि सुपर 12 में सभी टीमों के साथ खेलना है इसलिए किसी भी मैच को हलके में तो लिया ही नहीं जा सकता, विशेषकर बल्लेबाज़ी में बदलाव की सम्भावना मेरे हिसाब से तो बहुत कम है, इसलिए मैंने कहा कि बल्लेबाज़ी को लेकर सेलेक्टर्स को शायद बिलकुल भी दिमाग़ नहीं लगाना पड़ा होगा। दिनेश कार्तिक को लेकर आप ज़रूर कुछ सवाल उठा सकते हैं लेकिन इतने लम्बे टूर्नामेंट में आपके पास विकेट कीपिंग ऑप्शन ज़रूर होना चाहिए जो नंबर 6-7 पर आकर स्लॉगिंग कर सके या मैच फिनिशर की भूमिका अदा कर सके.

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अब बात गेंदबाज़ी की तो मेरा मानना है कि बल्लेबाज़ी में दिमाग़ लगाने में सेलेक्टर्स ने जो समय बचाया उसे शायद गेंदबाज़ों के सेलेक्शन के समय इस्तेमाल नहीं किया। और यह बात मैं इसलिए कहा रहा हूँ कि यह टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया में हो रहा है जहाँ 140+ गेंदबाज़ों की चलती है न कि मीडियम पेसर्स की. और 140 फेंकने वाले वो गेंदबाज़ भी नहीं जिनकी गेंद कभी कभार ही स्पीड गन पर इस रफ़्तार को पार करे बल्कि ओवर में कई गेंदें इस रफ़्तार को पार करने वाला गेंदबाज़ चाहिए और तभी उसका वैरिएशन भी ज़्यादा प्रभावी नज़र आएगा। टीम इंडिया को अगर देखें तो हमारे पास सिर्फ बुमराह ही अकेला गेंदबाज़ है जो ऐसा करता आ रहा है, कुछ नाम हैं जो ज़हन में हैं, एक नाम उमरान मलिक का है, कुछ ही दिन पहले की बात है, सेलेक्टर्स का सबसे चहीता था, तेज़ गेंदबाज़ी का भविष्य, आज फिलहाल गुमनामी में है, फर्स्ट लाइन में भी नहीं है, शायद सेकंड या थर्ड लाइन में. फर्स्ट लाइन में होता तो शायद रिज़र्व में ज़रूर दिख रहा होता। 140+ लगातार डालने में सक्षम एक गेंदबाज़ और मोहम्मद सिराज के रूप में भी है, विशुद्ध तेज़ गेंदबाज़, जो तेवरों से भी तेज़ गेंदबाज़ लगता है, ऑस्ट्रलिया में अपने आपको साबित भी कर चूका है, मगर शायद सेलेक्टर्स को साबित नहीं कर पाया। मोहम्मद शामी ने ज़रूर रिज़र्व में जगह बनाई है मगर हर्षल पटेल और भुवनेश्वर जब मुख्य टीम में है तो फिर रिज़र्व में राहुल चाहर क्या कर रहे हैं, यह तीनों तो एक जॉनर के गेंदबाज़ हैं, एक को हटाओ तो इनमें से दूसरे को खिलाओ।

वैसे भी टी-20 टीम में हर्षल पटेल के आने बाद भुवनेश्वर की जगह तो बनती ही नहीं है, भारत तीन तेज़ और दो स्पिनर्स के साथ ही ज़्यादातर मैदान में उतरता है। बुमराह और अर्शदीप की स्लॉट भी पक्की है और चौथा तेज़ गेंदबाज़ी विकल्प हार्दिक पंड्या हैं तो भुवनेश्वर तभी खेल सकते हैं जब हर्षल न खेलें या फिर बुमराह या अर्शदीप में कोई इंजर्ड हो, अर्शदीप बांय हाथ के साथ आक्रमण को धार दे रहे हैं. तो मेरे हिसाब से भुवी को ज़्यादातर बेंच पर बैठना पड़ेगा, ऐसे में उनकी कॉपी दीपक चाहर को रिज़र्व में रखना समझ से परे है. स्पिन आक्रमण में विशुद्ध रूप से एक ही गेंदबाज़ है चहल, अश्विन और अक्षर को तो आल राउंडर की भूमिका में गिना जाता है. मेरे हिसाब से तो टीम में एक 140+ तेज़ गेंदबाज़ की कमी है. आप क्या सोचते हैं?