सैल्यूट श्रीलंका

सच में एशिया कप में श्रीलंका का अद्भुत रिकॉर्ड है
 
asia cup 2022

अमित बिश्‍नोई

 

किसी टीम में जब चैम्पियन बनने का जज़्बा हो तो फिर टॉस का जीतना, हारना उसके लिए कोई मायने रखता। एक चैंपियन टीम की यही खूबी होती है कि वह इन सब चीज़ों को खेल का एक हिस्सा मानकर अपने खेल को जारी रखे. एशिया कप में श्रीलंका की टीम कुछ ऐसी ही नज़र आयी जिसमें नाम बड़े बड़े भले ही न नज़र आ रहे हों पर टीम बड़ी ज़रूर दिखी, बिना स्टार वाली स्टार टीम. देखा जाय तो एशिया कप को जीतने की सही हकदार थी श्रीलंका और उसे उसकी मेहनत का सुफल भी मिला। श्रीलंका ने दिखा दिया कि टीम परफॉरमेंस किसे कहते हैं, खुद में विशवास किसे कहते हैं, साथियों पर भरोसा किसे कहते हैं. दबाव से कैसे निकलते हैं. आप यकीन कीजिये कि श्रीलंका की एशिया कप में जिस तरह की शुरुआत हुई थी किसी भी टीम के लिए वापसी करना बड़ा मुश्किल था मगर श्रीलंका ने न सिर्फ वापसी की बल्कि उस वापसी को एक सर्वोच्च मक़ाम भी दिया, छठी बार एशिया कप जीतकर। सच में एशिया कप में श्रीलंका का अद्भुत रिकॉर्ड है. भारत सात बार चैम्पियन बना है तो श्रीलंका भी उसके काफी करीब पहुँच गया है। 

आप श्रीलंका की टीम पर अगर नज़र डालेंगे तो एक हासुरंगा ही आपको अंतर्राष्ट्रीय या स्टार खिलाडी नज़र आएंगे क्योंकि वो पूरी दुनिया में क्रिकेट लीग का हिस्सा बनते रहे हैं. मगर जब हम एशिया कप में श्रीलंका की टीम का प्रदर्शन देखते हैं तो हमें बहुत से स्टार खिलाड़ी नज़र आने लगते हैं. कुशल मेंडिस, पाथुम निसंका, दासुन शनाका और भानुका राजापक्षा जहाँ बल्लेबाज़ी के स्टार साबित हुए वहीँ गेंदबाज़ी में दिलशान मदुशंका, प्रमोद मदुशन और महीश थीक्षना किसी भी टीम को सस्ते में समेटने में सक्षम नज़र आये और इन सबके बीच एक आलराउंडर के रूप में वनिंदू हासुरंगा एक पुल का काम करते हैं, दोनों किनारों को मिलाने का, इस पार से उसपार अपनी मंज़िल तक पहुँचने का.  

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श्रीलंका के अगर पिछले प्रदर्शनों को देखें तो टॉस हारने के बाद वो अपने पिछले सात मैच लगातार हार चुके थे मगर फाइनल में उन्होंने उस सिलसिले को भी तोड़ दिया और उस मैदान पर तोडा जहाँ टॉस का हारना मतलब मैच का हारना माना जाता है. श्रीलंका ने इस मिथ को भी गलत साबित कर दिया और यह सब एक चैंपियन टीम ही कर सकती है. अगले महीने ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी -20 विश्व कप में प्रवेश के लिए श्रीलंका को अभी क्वालिफाइंग राऊंड खेलना है और श्रीलंका के लिए एशिया कप में खिताबी जीत उसके लिए एक बूस्टर साबित हो सकती है. वैसे मौजूदा फॉर्म को देखते हुए श्रीलंका को इसमें ज़्यादा मुश्किल नहीं आना चाहिए। श्रीलंका पिछले एक साल में श्रीलंका की टीम की परफॉरमेंस में बड़ा सुधार आया है और यह सुधार ऐसे काल में आया है जब श्रीलंका के अंदरूनी हालात बहुत ख़राब हैं, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक बदहाली का दौर है यहाँ तक श्रीलंका में एशिया कप का आयोजन भी संभव नहीं हो पाया और एशिया कप को यूएई शिफ्ट करना पड़ा. इन सबके बावजूद श्रीलंका की टीम एशिया कप की चैंपियन बनी। 

वहीँ पाकिस्तान पर नज़र डालें तो एक ही बात कही जा सकती है कि यह टीम एशिया कप के फाइनल में पहुँचने लायक नहीं थी. बस कुछ अपने भाग्य और कुछ अपोनेंट की बदकिस्मती से वो फ़ाइनल में पहुँचने में कामयाब हुई. एकबार और साबित हो गयी कि पाकिस्तान को अगर पस्त करना है तो बाबर को पस्त करना काफी, रिज़वान भले ही रन बना रहे हैं मगर वो पकिस्तान की जीत में कितना योगदान कर रहे हैं यह समीक्षा का विषय है, पाकिस्तान के शेष बल्लेबाज़ तो बड़बोले ही हैं, फिर चाहे वो 150 छक्के लगाने की रोज़ प्रैक्टिस करने का दावा करने वाले बद्तमीज़ आसिफ अली हों या फिर अफ़ग़ानिस्तान की हार पर मैदान में घुसकर कर जश्न मनाने (चिढ़ाने) वाले खुशदिल शाह. पाकिस्तान से कहीं बेहतर क्रिकेट अफ़ग़ानिस्तान और भारत ने खेली मगर शायद किस्मत इनके साथ नहीं थी. बहरहाल श्रीलंका ने अपने खेल से साबित कर दिया कि एशिया कप चैम्पियन एक सही और हक़दार टीम टीम ही बनी. मेरी तरफ से श्रीलंका के जज़्बे और हौसले को एक सैल्यूट तो बनता ही है।