Rupal Chaudhary Meerut: मेरठ की बेटी रूपल चौधरी का एक और कमाल,रजत के बाद जीता कास्य

 
Rupal Chaudhary Meerut

मेरठ। कोलंबिया में चल रहे अंतराष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मेरठ की बेटी रूपल चौधरी ने एक बार फिर से कमाल कर दिया है। इस बार रूपल चौधरी ने कास्य पदक झटका है। अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैैंंपियनशिप में मेरठ की बेटी रूपल चौधरी ने अपने पहले ही दौरे में लगातार दूसरा पदक जीतकर देश का नाम रोशन का दिया है। अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 51.85 सेकंड के साथ रूपल चौधरी ने इस उपलब्धि को हासिल किया है। ग्रेेट ब्रिटेन की येमी मेरी ने 51.50 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता। जबकि केन्या की दमारिस मुतुंगा ने 51.71 सेकंड के साथ रजत पदक झटका। भारत की बेटी रूपल चौधरी केन्या की दमारिस मुतुंगा से मात्र 14 सेंकेड पीछे रह गई। नहीं तो वो रूपल चौधरी रजत पदक जीत जातीं। 

बता दें कि रूपल के पहले ही अंतरराष्ट्रीय दौरे पर लगातार दुसरे पदक जीतने से घर में खुशी का माहौल है। आज जब रूपल ने अपना दूसरा पदक जीता और टीवी देख रहे परिजनों को इसकी जानकारी हुई परिजनों ने आसपास के लोगों को लडडू खिलाकर मुंह मीठा करवाया। वहीं कोच रूपल के कोच विशाल सक्सेना व अमिता सक्सेना ने रूपल चौधरी की इस जीत पर खूब खुशी जाहिर की है। दोनों कोच का सीना रूपल चौधरी की इस जीत से गर्व से चौड़ा हो गया है। कोच का कहना है आज उनकी मेहनत सफल हो गई। उन्होंने बताया कि मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रेक न होने के कारण वो रूपल को प्रैक्टिस कराने के लिए दिल्ली सिंथेटिक ट्रेक पर ले जाते थे। 

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कोच ने कहा कि कआज रूपल चौधरी ने जो भी उपलब्धि हासिल की है उसके पीछे रूपल की अपनी मेहनत है। बताते हैं कि रूपल सुबह तीन बजे उठकर अभ्यास शुय का देती थी। अपनी इसी कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत रूपल ने अंतराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में अब तक दो मैडिल जीते हैं। रूपल के पास अभी दो मौके और हैं। रूपल चौधरी अगर इन दोनों में भी इसी तरह से प्रदर्शन करती हैं। तो वो जूनियर एथलीट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक भी जीत सकती है।

वहीं मेरठ एथलीट संघ ने भी रूपल चौधरी की इस जीत पर उसको बधाई दी है। मेरठ एथलीट संघ ने रूपल चौधरी को अन्य दो मुकाबले के लिए स्वर्ण पदक जीत की संभावना के साथ ही अग्रिेम बधाई दी है। वहीं रूपल के परिजनों का कहना है कि रूपल चौधरी को अभ्यास के लिए कहीं से कोई सहायता नहीं मिली। रूपल ने अपने कोच की मदद से ही आज ये सफलता हासिल की है। परिजनों का आरोप है कि खेल के मामले में सरकार बहुत उदासीन हैं। केदं्र और प्रदेश की सरकारें अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों पर कोई ध्यान नहीं देती है। जिसके कारण अधिकांश को प्रतियोगिता के दौरान निराशा हाथ लगती हैं। कुछ लोग रूपल चौधरी जैसे होते हैं। जो कि प्रतियोगिता में अपना दमखम लगाकर पदक जीत लेते हैं।