सेमीफाइनल के सपने से पहले ऑस्ट्रेलिया में अपना पहला T20I तो जीते पाकिस्तान

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अमित बिश्‍नोई

एक कहावत है कि घर में नहीं दाने और अम्मा चलीं भुनाने। यह कहावत पाकिस्तान की क्रिकेट टीम पर बिलकुल चरितार्थ होती है. इस टी 20 विश्व कप में वह अपने पहले दोनों मैच हार चुकी है, पॉइंट्स टेबल पर अभी उसका नाम भी नहीं है, यहाँ तक कि ऑस्ट्रेलिया की धरती पर उसने अभी तक कोई भी टी 20 मैच नहीं जीता है लेकिन सपने सेमीफाइनल खेलने के देख रही है. ठीक है कि सपने देखने पर कोई टैक्स नहीं लगता है और न ही कोई रोकटोक है लेकिन सपने भी तो वही देखना चाहिए जिनके सच होने का कोई आधार हो, आपको अभी अपनी पहली जीत का इंतज़ार है, पहले अपनी पहली जीत तो हासिल करो इसके बाद इस तरह की कोई बात करो. वैसे पाकिस्तान को यह सपना देखने के लिए सिर्फ पहली जीत ही नहीं बाकी दो और जीत भी चाहिए फिर यह सपना देखने के बारे में सोचना चाहिए।

पाकिस्तान की टीम जब विश्व कप के लिए रवाना हुई थी बड़ा शोर था कि अपने तेज़ गेंदबाज़ों और बाबर और रिज़वान के दम पर सभी टीमों पर भारी पड़ेगी, कहा जा रहा था इंग्लैंड से शाहीन आएगा और आते ही विश्व कप में छा जायेगा। मगर वह तो पाकिस्तान का लंगड़ा घोडा साबित हुआ, बता दें कि पाकिस्तान का यह अरेबियन घोड़ा श्रीलंका के खिलाफ के फील्डिंग के दौरान लंगड़ा हो गया था और पिछले ढाई महीने से इंग्लैंड में रहकर अपनी टांग को ठीक करा रहा था ताकि विश्व कप की रेस में वह तेज़ दौड़ सके मगर तेज़ दौड़ना तो छोड़िये वह तो दो मैचों में ढंग से भी नहीं दौड़ पाया। भारतीय बल्लेबाज़ों ने उसे धुना और ज़िम्बाब्वे के बल्लेबाज़ों ने भी उसकी फ़ज़ीहत कर दी. यह घोड़ा पाकिस्तान के लिए इतना लंगड़ा साबित हुआ कि उसे दो मैचों में एक भी विकेट नसीब नहीं हुआ जबकि पाकिस्तान ने अपनी सारी आशाएं इसी घोड़े पर लगा रखी थी.

पाकिस्तान के लिए कोढ़ में खाज वाली स्थिति उस समय उत्पन्न हो गयी जब बाबर और रिज़वान के रूप में उनके दो मैच जिताऊ घोड़े भी फिसड्डी साबित हुए. ऑस्ट्रेलिया की तेज़ पिचों पर उनकी सारी असलियत खुलकर सामने आ गयी. जो कल तक पाकिस्तानियों के लिए एक हीरो थे आज उनके लिए विलेन बन गए . समर्थक अब उनकी कमियां निकाल रहे हैं, पुराने बल्लेबाज़ों को वापस बुलाने की बातें कर रहे हैं, वसीम अकरम जैसे खिलाडी गधे को बाप बनाने की सलाह दे रहे हैं. कुल मिलाकर पाकिस्तानी टीम की बखिया उधेड़ी जा रही है. पूर्व खिलाडी बौखला रहे हैं, भारत की हार की बद्दुआ दे रहे हैं। धोबी से जीत न पावे गधे के कान उमेठने वाली बात, खिसिलयानी बिल्ली खम्बा नोचे शायद इसी को कहते हैं. कहें तो पाकिस्तानी टीम इस समय पूरी तरह तीतर बितर नज़र आ रही है, खिलाडी मैदान में रो रहे हैं, कप्तान का चेहरा लटका हुआ है मानों घर में किसी की मय्यत हो गयी है.

लेकिन इसके बावजूद बातों के बादशाह बड़ी बड़ी बातों से बाज़ नहीं आ रहे हैं, मिस्बाह, वसीम अकरम, वक़ार यूनुस और शोएब मालिक जैसे खिलाड़ी इस गुणा भाग में लगे हुए हैं कि पाकिस्तान टीम कैसे सेमीफाइनल में पहुँच सकती है. उनका गुणा भाग पाकिस्तान की जीत से ज़्यादा इस बात पर है कि कौन सी टीम के हारने या कौन सी टीम के जीतने से पाकिस्तान के लिए मौके बनेगें। अरे भाई भारत साउथ अफ्रीका को हराये या साऊथ अफ्रीका भारत को, आपके लिए तो गुणा भाग करने का मौका तब ही बनेगा जब आप ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पहला टी 20 आई मैच जीतोगे। इसलिए पाकिस्तान वालों पहले अपना पहला मैच जीतो फिर सेमीफाइनल का सपना देखो।

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