फीफा ने जब भारतीय फुटबॉल संघ पर प्रतिबन्ध लगाया था तो पूरे विश्व में भारत को शर्मसार होना पड़ा था क्योंकि बैन लगाए जाने की जो वजह थी वो भारतीय राजनेताओं की हठधर्मी और जबरन पद पर बैठे रहने की लालसा थी. खेल संघों पर अंगद की तरह पैर जमाये इन नेताओं की वजह से भारत में आयोजित होने वाला महिला अंडर-17 फुटबॉल वर्ल्डकप भी खतरे में पड़ गया था. बाहर हाल अब अच्छी खबर यह है कि फीफा ने प्रतिबन्ध को हटा लिया है और महिला अंडर-17 फुटबॉल वर्ल्डकप के आयोजन का रास्ता साफ़ हो गया है.
दरअसल फीफा ने भारतीय फूटबाल संघ पर प्रतिबन्ध इसलिए लगाया था क्योंकि ऑल इंडिया फुटबॉल फैडरेशन में तीसरे पक्ष का दखल हो रहा था. भारतीय फूटबाल संघ पर प्रतिबंध लगाने के बाद फीफा ने एक बयान जारी कर कहा कि तीसरे पक्ष के बहुत ज़्यादा हस्तक्षेप के कारण अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ को निलंबित करने का फैसला लिया जाता है. इस बयान में आगे कहा गया था कि फीफा को इस बात की पुष्टि मिलने के बाद यह निर्णय ले रहा है कि AIFF कार्यकारी समिति की शक्तियों को ग्रहण करने के लिए स्थापित COA को समाप्त कर दिया गया है और AIFF प्रशासन ने एआईएफएफ के रोजाना के मामलों पर पूरा कण्ट्रोल हासिल कर लिया था.
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बयां के मुताबिक FIFA और AFC स्थिति की निगरानी करना जारी रखेंगे और AIFF को समय पर चुनाव कराने में का समर्थन करेंगे. दरअसल भारतीय फुटबॉल में यह सारा विवाद AIFF के अध्यक्ष पद को लेकर था जिसपर एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल कार्यकाल पूरा होने के बाद भी बरसों से डटे हुए थे. प्रफुल्ल पटेल का कार्यकाल 2009 से शुरू हुआ था और 2020 में खत्म हुआ था, यानि पिछले दो साल से वह सारे नियमों को टाक पर रख कर कुर्सी पर बैठे रहे. इसी का नतीजा था कि फूटबाल वर्ल्ड भारत की साख को बट्टा लगा. फीफा ने भले ही प्रतिबन्ध को वापस ले लिया है लेकिन इन नेताओं के कारण भारत की जो बदनामी हुई वो कभी वापस नहीं हो सकती।

