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सपा या कांग्रेस, किसने दिखाया बड़ा दिल?

आर्टिकल/इंटरव्यूसपा या कांग्रेस, किसने दिखाया बड़ा दिल?

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अमित बिश्नोई
लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को है, मतलब अब सिर्फ 24 घंटे ही बचे हैं. वैसे तो पूरे देश में 19 अप्रैल को 102 सीटों पर मतदान होना है लेकिन निगाहें सबकी उत्तर प्रदेश पर लगी हुई हैं जहाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर शुक्रवार को वोट पड़ने वाले हैं. मोदी जी तो इस क्षेत्र में दो बड़ी चुनावी सभाएं कर चुके हैं, अखिलेश ने भी कई सभाएं की हैं. आज भी मुरादाबाद में उन्होंने रुचिवीरा और संभल के लिए ज़ियाउर्रहमान के वास्ते लोगों से एक बड़ी चुनावी रैली में मत और समर्थन माँगा। कांग्रेस आज पहली बार यहाँ एक्टिव हुई, प्रियंका गाँधी ने सहारनपुर में एक बड़ा रोड शो किया लेकिन आज की ख़ास बात राहुल गाँधी और अखिलेश यादव की गाज़ियाबाद में संयुक्त प्रेस रही, वहां जो कुछ कहा गया और जो कुछ नहीं कहा गया वो और फिर प्रेस कांफ्रेंस के बाद मुरादाबाद की जनसभा में अखिलेश यादव ने गठबंधन को लेकर जो बात कही वो ख़ास है जिसपर चर्चा ज़रूरी है।

गाज़ियाबाद की प्रेस कांफ्रेंस वैसे तो इंडिया गठबंधन की मज़बूती को दर्शाने के लिए और ये जताने के लिए सपा और कांग्रेस दोनों ही देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए एक साथ आये हैं. इस पत्रकार वार्ता में पत्रकारों ने कई सवाल पूछे और दोनों ही नेताओं ने उसके अपने ढंग से जवाब दिए. इन सवालों में एक सवाल सपा और कांग्रेस में सीट शेयरिंग को लेकर था, सवाल था कि इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पार्टी ने काफी कम उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं तो क्या यूपी में कांग्रेस खुद को कमज़ोर महसूस कर रही है जो अपने सहयोगियों को ज़्यादा सीटें दे रही है. पत्रकार का सीधा इशारा समाजवादी पार्टी की तरफ था क्योंकि सपा जहाँ 63 सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीँ कांग्रेस के लिए उसने 17 सीटें छोड़ी हैं। सवाल दोनों ही नेताओं को असहज करने वाला था. चूँकि सवाल राहुल गाँधी से पूछा गया था तो जवाब भी उन्होंने ही दिया और कहा कि चूँकि चुनाव इंडिया गठबंधन लड़ रहा है इसलिए कांग्रेस पार्टी ने फ्लेक्सिबिलिटी दिखाई है और अपने सहयोगियों को स्पेस दी है, इसका कमज़ोरी से कोई मतलब नहीं है, एक तरह से उन्होंने कांग्रेस पार्टी को बड़ा दिल दिखाने की बात कही. राहुल गाँधी जब इस सवाल का जवाब दे रहे थे तब अखिलेश के चेहरे के भाव थोड़ा असहज लग रहे थे. वैसे भी प्रेस कांफ्रेंस में वो खुद को थोड़ा अकेला ही महसूस कर रहे थे क्योंकि पत्रकार भी लगातार राहुल गाँधी से ही सवाल पूछे जा रहे थे, आखिर में पत्रकार वार्ता को कंडक्ट कर रहे कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश को पत्रकारों से कहना पड़ा कि आप लोग अगले तीन चार सवाल कृपया अखिलेश जी पूछिए। अखिलेश को शायद ये बात बुरी भी लगी क्योंकि जब उनसे सवाल पूछा गया तो जवाब देने से पहले उन्होंने धन्यवाद किया कि उनसे सवाल पूछा गया. वैसे भी राहुल गाँधी ने सहयोगियों को स्पेस देने वाली जो बात कही, वो भी अखिलेश को पसंद नहीं आयी, हालाँकि उन्होंने पत्रकार वार्ता को ढंग से समाप्त किया लेकिन लग रहा था कि कोई टशन रह गयी है.

और सच में ये टशन और नागवारी मुरादाबाद की चुनावी रैली में नज़र आ गयी. मुरादाबाद में अखिलेश ने सुबह की प्रेस वार्ता की चर्चा भी की और कहा कि इंडिया गठबंधन गाज़ियाबाद से लेकर गाज़ीपुर तक भाजपा का सफाया करेगा लेकिन साथ ही गठबंधन पर अखिलेश ने इस बात को जाता दिया कि आज अगर इंडिया गठबंधन ज़िंदा है तो वो समाजवादियों की वजह से ही ज़िंदा है, समाजवादी पार्टी ने ही इंडिया गठबंधन को बचाने का काम किया है. अखिलश ने कहा कि हमें ज़्यादा सीट देनी पड़ीं तब भी हमने परवाह नहीं की. अखिलेश ने कहा कि लोग पूछते थे कि कांग्रेस को इतनी सीटें क्यों दीं, तो हम कहते थे कि इंडिया गठबंधन मज़बूत बने इसलिए हमने कांग्रेस को 17 सीटें दे दीं. अखिलेश का ये बयान प्रेस वार्ता में राहुल गाँधी द्वारा बड़ा भाई बनने या फिर बड़े दिलवाला बनने की बात पर पलटवार कहा जायेगा। अखिलेश ने सिर्फ चंद घंटे में ये जता दिया कि दरअसल यूपी में कांग्रेस की कोई हैसियत नहीं है, ये तो उसका बड़प्पन है जो उसने कांग्रेस पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए 17 सीटें दी हैं।

अब पहले चरण के मतदान से कुछ घंटे पहले दोनों ही पार्टियों ने ज़्यादा कुछ न कहते हुए भी बहुत कह दिया। हालाँकि अखिलेश यादव की बात बहुत हद तक सही है कि इंडिया गठबंधन को पूरी तरह बिखरने से बचाने में उसकी ही मुख्य भूमिका रही है वरना ममता बनर्जी और नितीश कुमार के इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने के बाद इसके टूटने में कोई कसर नहीं रही गयी थी। देखा जाय तो अखिलेश यादव ने वास्तव में बड़ा दिल दिखाया और कांग्रेस पार्टी के लिए 17 सीटें छोड़ी। अभी अगर हम हो रहे ओपिनियन पोल्स की बात करें तो इस गठबंधन से सपा को कोई ज़्यादा फायदा होता नज़र नहीं आ रहा है। अमेठी पर कांग्रेस की तरफ से कोई एलान नहीं हुआ मगर पोल्स के हिसाब से कांग्रेस सिर्फ रायबरेली सीट ही जीत सकती है जबकि सपा की टैली इस बार बढ़ेगी तो ऐसे में अखिलेश का ये जताना कि इंडिया गठबंधन का आज जो वजूद है उसी की बदौलत है, सही है.

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