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सपा-कांग्रेस: सीट शेयरिंग पर बनने लगी बात

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अमित बिश्नोई
अयोध्या में एक तरफ राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां चल रही वहीँ दूसरी तरफ लोकसभा सभा चुनाव के लिए भी पार्टियों का गठजोड़ और गुणा भाग शुरू हो गया है. राहुल गाँधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले हुए हुए हैं तो अखिलेश यादव भी PDA यात्रा शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं. मायावती ने लोकसभा चुनाव में एकला चलो का एलान कर दिया है और अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग की बाते भी आगे बढ़ने की ख़बरें आने लगी हैं. पिछले दो दिनों से कांग्रेस और सपा खेमे से दो बयान आये जिनसे पुष्टि होती है कि मायावती का मुद्दा स्पष्ट होने के बाद अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में गठजोड़ को लेकर बात आगे बढ़ने वाली है, वरना इससे पहले दोनों ही पार्टियां असमजस की हालत में नज़र आ रही थीं.

एक बयान कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की तरफ से आया कि समाजवादी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बात काफी आगे बढ़ चुकी है, कांग्रेस पार्टी ने हर लोकसभा क्षेत्र को लेकर एक रिपोर्ट समाजवादी पार्टी को सौंप दी है, इस रिपोर्ट में कांग्रेस पार्टी द्वारा बताया गया है कि कहाँ किस पार्टी के भाजपा से टक्कर लेने के ज़्यादा अच्छे मौके हैं. इस रिपोर्ट के बाद अब जल्द ही राहुल गाँधी और अखिलेश यादव के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी है जिसमें सीट शेयरिंग का फार्मूला तय हो जायेगा। दूसरा बयान कल अखिलेश यादव की तरफ से आया, उन्होंने पहली बार राहुल गाँधी को भारत जोड़ो यात्रा के लिए शुभकामनायें दीं और कहा वो न्याय दिलाने के जिस मिशन पर निकले हैं उसमें उन्हें सफलता मिलेगी, इसके साथ ही उन्होंने पहली बार ये कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और दूसरी सहयोगी पार्टियों के साथ मिलकर भाजपा का सफाया करेंगे। अबतक वो इंडिया गठबंधन का नाम लेते थे लेकिन इस बार उन्होंने सीधे कांग्रेस पार्टी का नाम लिया।

याद रहे कि दोनों नेताओं के ये बयान मायावती के उस फैसले के बाद आये जिसमें बसपा सुप्रीमो ने लोकसभा चुनाव से पहले किसी भी पार्टी से गठबंधन न करने की बात कही थी. मायावती का कहना था कि बहुजन समाज पार्टी को चुनाव पूर्व गठबंधन करने से हमेशा नुक्सान होता है क्योंकि दूसरे दलों को बसपा के वोट बैंक का फायदा मिल जाता है लेकिन बसपा को सहयोगी दल के वोट बैंक का लाभ नहीं मिलता। मायावती की इस बात का अखिलेश यादव ने जवाब भी दिया और कहा कि सपा से गठबंधन के बाद ही बसपा की लोकसभा में सीटें 0 से 10 पहुँच गयी थीं जबकि सपा को पांच ही सीटें मिली थी जो उसे पिछले लोकसभा चुनाव में भी मिली थीं, इससे साफ़ पता चलता है कि गठबंधन से किसे फायदा पहुंचा था.

दरअसल अखिलेश यादव किसी भी हालत में नहीं चाहते थे कि इंडिया गठबंधन में मायावती शामिल हों, इसीलिए जब भी मायावती को इंडिया अलायन्स में शामिल करने की बात उठती थी तो अखिलेश यादव हमेशा भरोसे का सवाल उठाते रहे, कहते रहे कि मायावती भरोसे के लायक नहीं हैं। अब जबकि इंडिया गठबंधन से मायावती का चैप्टर क्लोज हो चूका है तो सपा और कांग्रेस नेताओं के सुर भी बदल चुके हैं और अब उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों ही पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग कोई समस्या नहीं रहेगी. सलमान खुर्शीद की माने तो अखिलेश और राहुल की ये महत्वपूर्ण बैठक भारत जोड़ो यात्रा के उत्तर प्रदेश पहुँचने से पहले हो जाएगी और कौन कितनी सीट और कहाँ कहाँ से चुनाव लड़ेगा ये भी तय हो जायेगा। इसका मतलब है कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा के उत्तर प्रदेश पहुँचने पर राहुल और अखिलेश को मंच साझा करते हुए भी देखा जा सकता है.

दूसरी तरफ भाजपा अभी अयोध्या में पूरी तरह बिज़ी है, उसे अभी लोकसभा चुनाव के लिए किसी भी तरह की जल्दबाज़ी नहीं है, वो जानती है कि उसके पास राम मंदिर के रूप में ऐसा अमोघ अस्त्र है जिसकी काट सारे विपक्षी एक होकर भी नहीं निकाल सकते। फिर भी उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहाँ लोकसभा की 80 सीटें आती हैं सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बात आगे बढ़ना भाजपा के लिए चिंता की बात तो ज़रूर है, भाजपा और मोदी जी के लिए यूपी सबसे महत्वपूर्ण है, पीएम मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठना है तो उसे यूपी में अपने प्रदर्शन को हर हालत में बरकरार रखना पड़ेगा, ऐसे में वो भले ही सपा और कांग्रेस की नज़दीकियों को नज़रअंदाज़ करे मगर सच्चाई से आँखें नहीं चुरा सकती। समाजवादी पार्टी का तो यूपी में जनाधार है ही और अब कांग्रेस के लिए लोगों में दिलचस्पी बढ़ने लगी है. अब देखना होगा कि राहुल और अखिलेश की मीटिंग कब होती है और उस बैठक से कैसे नतीजे निकलते हैं.

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