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कोरोना जाँच की धीमी रफ्तार जानलेवा हो रही साबित


कोरोना जाँच की धीमी रफ्तार जानलेवा हो रही साबित

हापुड । कोरोना जांच की धीमी रफ्तार जिले के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है जिले की 13 लाख आबादी के सापेक्ष 3 महीने में सिर्फ 55 00 लोगों की जांच हो पाई है । इनमें कुल संदिग्धों के 6.90 फीसदी (380) मरीज ही संक्रमित मिले हैं । बड़ी बात यह है कि यदि जिले में जांच का दायरा बढ़ाया जाए तो निश्चित ही कोरोना के मरीजों में वृद्धि होगी । हापुड़ में जांच की कोई व्यवस्था नहीं है । मरीजों के सैंपल मेरठ या लखनऊ भेजे जाते हैं ।

जिले में कोरोना का पहला मामला 2 अप्रैल को सामने आया था । शासन और प्रशासन तभी से कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं । लेकिन मरीजों का ग्राफ यहां लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है आलम यह है कि हापुड़ में कोरोना के मामला आए करीब 3 महीने बीत चुके हैं । लेकिन अभी तक यहां जांच की कोई सुविधा शुरू नहीं हो सकी है । जांच के सीमित साधन होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए चुनिंदा लोगों के सैंपल ही जांच को भेज पाते हैं ।

यही कारण है कि अभी तक जिले से करीब पांच हजार सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं । इनमें से 380 मरीज सकर्मित मिले हैं । जो कुल भेजें संदिग्धों के करीब 6.90 हैं । जबकि जिले की आबादी करीब 13 लाख है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ रेखा शर्मा ने बताया कि संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले तमाम लोगों की जांच कराई गई है रेंडम टेस्ट भी कराए जा रहे हैं ।

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