नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय का मानना है कि आने वाले त्योहारी सीजन में मैन्यूफैक्चरिग में अच्छी बढ़ोतरी होगी। पिछले कुछ महीनों से औद्योगिक जिंसों की कीमतें कम हुई हैं और त्योहारी सीजन में उपभोक्ता मांग में इजाफा होगा। मंत्रालय को उम्मीद है कि इससे ग्रामीण और शहरी दोनों जगहों पर उपभोक्ता की खपत में बढ़ोतरी होगी। औद्योगिक जिंसों की कीमत कम होने से त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को बढ़ी कीमतों पर वस्तुएं नहीं खरीदनी पड़ेगी। आरबीआइ के सर्वे में कहा है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों के उत्पादन और नए ऑर्डर में इजाफा होगा। मैन्यूफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स में गत तीन महीनों से दहाई अंक में बढ़ोतरी मैन्यूफैक्चरिंग में तेजी के संकेत दे रही है। सितंबर माह से त्योहारी सीजन भी शुरू हो रहा है जो साल के आखिर तक बना रहेगा।
वित्त मंत्रालय की इस रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून के कारण खरीफ बुवाई को मदद मिल रही है और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बढ़ने से ग्रामीण मांग में बढ़ोतरी संभव है। मंत्रालय के अनुसार संपर्क से चलने वाले सेक्टर से लोग परहेज नहीं कर रहे हैं और खुलकर सैर-सपाटे के साथ होटल व रेस्टोरेंट जा रहे हैं। इससे शहरी इलाकों की खपत में बढ़ोतरी होने की संभावना है। मंत्रालय के अनुसार टूरिज्म, होटल जैसे उद्योग एक बार फिर से कोरोना काल से पूर्व की स्थिति में पहुंचने की स्थिति में आ रहे हैं। पिछले दो महीने में सेवा सेक्टर के परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स में बढ़ोतरी हो रही है। इस साल फरवरी माह के अंत में रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने से तांबा,स्टील, जिंक, एल्युमीनियम,चांदी जैसे औद्योगिक जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। लेकिन जून के बाद से इन जिंसों के भाव में गिरावट हो रही है। कच्चे तेल के वैश्विक दाम लगातार कम हो रहे है।
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औद्योगिक निर्माताओं के अनुसार वे त्योहारी सीजन में अपनी पूरी क्षमता से मैन्यूफैक्चरिंग करेंगे। उनकी लागत कम हो गई है। लागत कम होने से मार्जिन प्रभावित नहीं होगा। कंज्यूमर ड्यूरेबल और रिटेल कारोबारियों के अनुसार लागत कम होने से वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ेंगी और कुछ वस्तुओं पर उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर सरकार अर्थव्यवस्था में लगातार निवेश कर रही है। पूंजीगत व्यय के रूप में पहली तिमाही में 1.75 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं और इससे अर्थव्यवस्था में नई मांग निकलेंगी।

