बुलंदशहर। जिले में हाथरस कांड जैसी जघन्य घटना सामने आई है। जिसमें गैंगरेप के बाद एक युवती की हत्या कर दी गई। पुलिस ने पूरे मामले में लीपापोती की और घटना के बाद परिजनों को किसी से बात करने का मौका नहीं दिया गया। इस मामले में पुलिस ने जैसा चाहा वैसा खेल किया। मीडिया को इस बारे में गलत जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि युवती की प्रेमप्रसंग के कारण हत्या की गई। जबकि हकीकत कुछ और ही निकली। पुलिस के शिकंजे से बाहर आए मृतका गैंगरेप पीडिता के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने जैसा चाहा वैसा मुकदमा दर्ज किया। परिजन अब भी दहशत में हैं। यह मामला भी ठीक वैसे ही है। जैसा कि दो साल पहले हाथरस में हुआ था। जहां पर दलित युवती की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि किशोरी खेत में काम करने गई थी। वहां पर गांव के ही दबंग युवतों ने गैंगरेप किया और उसके बाद युवती की हत्या कर दी गई। हाथरस कांड की तरह यहां भी पुलिस ने आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के बजाए। पीडितों को ही कस्टडी में ले लिया। इतना ही नहीं पुलिस ने परिवार को डराकर आधी रात के बाद गैंगरेप पीडिता के शव का जल्दी से अंतिम संस्कार करा दिया।
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मामला बुलंदशहर के डिबाई-गालिबपुर गांव का मामला है। हालांकि घटना को करीब 10 दिन पहले की है। लेकिन अब मामला मीडिया की और राजनैतिक गलियारे की सुर्खियां बना हुआ है। माना जा रहा है कि इस मामले में बुलंदशहर पुलिस ने वहीं रवैया अपनाया जैसा कि हाथरस पुलिस ने वहां पर हुए गैंगरेप मामले में किया था। पूरे मामले को पुलिस ने दबा दिया था। लेकिन जब मीडिया को पता चला तो पुलिस ने परिजनों पर मुंह नहीं खोलने का दबाव बनाया। पुलिस ने कहानी बताया कि युवती की हत्या प्रेम प्रसंग के चलते की गई है। यहां भी पुलिस ने अरोपी का बचाव किया और कहा कि उसने भी आत्महत्या की कोशिश की। परिजनों का कहना है कि उन्होंने गैंगरेप की रिपोर्ट दर्ज करवाने की तहरीर दी भी लेकिन पुलिस ने गैंगरेप की धारा को एफआईआर में शामिल नहीं किया।
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ये है पूरा मामला :
डिबाई गालिबपुर गांव की रहने वाली किशोरी अपने घर से चारा लेने के लिए जंगल गई थी। इसी दौरान गांव के ही सौरभ ने अपने तीन साथियों के साथ उपका अपहरण किया और उसको एक टयूबवैल में ले जाकर गैंगरेप किया। इसके बाद किशोरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। परिजनों का आरोप है कि मौके पर जब वे और पुलिस पहुंची तो आरोपी भी टयूबवैल पर मौजूद था। लेकिन पुलिस ने किशोरी का शव वहां से तुरंत हटा दिया और जिला अस्पतला में रखवा दिया। परिजनों को पुलिस ने दबाव में लिया और दूसरे दिन पोस्टमार्टम कराकर रात में शव को परिजनों को सौंप अपने साथ गांव ले गए और अधिकारियों की मौजूदगी में जबरन अंतिम संस्कार करा दिया। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या कहीं पुलिस ने तो नहीं शव का अंतिम संस्कार किया और परिजनों पर दबाव डाला जा रहा हो। फिलहाल चुनावी माहौल में मामला एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा है। रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत ने इस पूरे मामले पर टवीट कर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।

