मक्का। सऊदी अरब की अदालत ने मक्का स्थित ख़ाना-ए-काबा के पूर्व इमाम और धर्म प्रचारक शेख़ सालेह अलतालिब को दस साल क़ैद की सज़ा सुनाई। ख़ाना-ए-काबा को हरमशरीफ़ के नाम से भी जाना जाता है। इसे मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। सऊदी अरब के अलावा अरब की बाक़ी मीडिया ने काबा के पूर्व इमाम को दस साल सज़ा सुनाए जाने की ख़बर को प्रमुखता दी है। अरब दुनिया की अलग वेबसाइटों के मुताबिक सऊदी अरब की अपील अदालत ने पूर्व इमाम और धर्म प्रचारक शेख़ सालेह अलतालिब के ख़िलाफ़ दस साल क़ैद की सज़ा सुनाई है।
काबा के पूर्व इमाम से संबंधित इस ख़बर को प्रकाशित करने वाले माध्यमों में क़तर से जुड़ा ‘अरबी 21’ भी है। उसने सूचना दी कि अपील अदालत ने निचली अदालत के फ़ैसले को पलट दिया। निचली अदालत ने धर्म गुरु और पूर्व इमाम को आरोपों से बरी कर दिया था। वेबसाइट के मुताबिक सऊदी अरब सरकार ने अगस्त 2018 में सालेह अलतालिब को बिना किसी वजह के गिरफ़्तार कर लिया था। सूत्रों के मुताबिक अलतालिब विभिन्न सऊदी अदालतों में जज की हैसियत से भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इनमें राजधानी रियाद की इमजेंसी अदालत और मक्का का हाईकोर्ट शामिल हैं। जहां उन्होंने गिरफ़्तारी से पहले काम किया। उनकी गिरफ़्तारी के बाद मानवाधिकार के समूहों और सऊदी अरब विरोधी माध्यम उनकी सज़ा को इस ख़ुत्बे जुमे की नमाज़ से पहले, ईद और बक़रीद की नमाज़ के बाद दिया जाने वाला धार्मिक प्रवचन से जोड़ कर देखते हैं। जो उन्होंने बुराई को ख़ारिज करने की अहमियत के बारे में दिया।
उस समय सऊदी अरब के एक कर्मचारी यह्या एसरी ने क़तर के आर्थिक सहायता से चलने वाले अलजज़ीरा नेट को बताया कि उनके देश में शासक उन लोगों को निशाना बनाते रहे हैं जो भविष्य में संभावित तौर पर सरकार और लोकप्रिय होने वाले लोगों पर सवाल उठा रहे हैं। यहीं कारण है कि उनको गिरफ्तार कर दस साल की सजा सुनाई गई है।
