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शाहरुख़ का फ़ुटबाल प्रेम या फिल्म प्रमोशन की बाज़ीगरी

shahrukh

अमित बिश्नोई
शाहरुख़ खान को एक सफल बिजनेसमैन कहा जाता है, फिल्म भले ही फ्लॉप हो जाय मगर वो फ्लॉप नहीं होते। अपनी फिल्म के प्रमोशन का हर ठिकाना तलाशना शाहरुख़ को अच्छी तरह आता है. बता दें शाहरुख़ खान की फिल्म पठान 25 जनवरी को रिलीज़ होने वाली है और रिलीज़ से पहले ही इसकी चर्चा हर एक की जुबां पर है. चर्चा की वजह यह नहीं कि फिल्म अच्छी है या बुरी बल्कि चर्चा का विषय है वो बिकनी जो शाहरुख़ की हीरोइन दीपिका ने पहनी है. इधर बिकनी के बवाल के साथ ही आज फीफा विश्व कप का फाइनल खेला जा रहा है, ऐसे में शाहरुख़ मौके पर चौका मारते हुए फ़ुटबाल विशषज्ञों के बीच मैच सेंटर पहुँच गए. वैसे तो वो यह बताने गए थे कि इस खेल के बहुत बड़े शौक़ीन हैं लेकिन फाइनल मैच से पूर्व शाहरुख़ के मैच सेंटर पहुँचने को लोगों ने फिल्म ‘पठान’ के प्रमोशन से जोड़ दिया। और जोड़ें भी क्यों न। जिस तरह से फिल्म से विवाद जुड़ा है और बहिष्कार जैसी बातें हो रही है वो फिल्म की और शाहरुख़ की सेहत के लिए ठीक नहीं है. ऐसे में शाहरुख़ मैच सेंटर जाकर मैच सेंटर का इस्तेमाल क्यों किया, एक सवाल तो बनता ही है.

जब आप फिल्म पठान और फीफा फाइनल को एकसाथ देखेंगे तो यह एक संयोग नहीं लगेगा बल्कि एक योजना मालूम पड़ेगी जिसका सिर्फ व्यावसायिक उद्देश्य है न कि खेल के प्रति लगाव। क्योंकि फ़ुटबाल एक ऐसा खेल है जिसमें सिर्फ एकतरफा प्रेम होता है. आप या मेस्सी के फैन हो सकते हैं या फिर एमबापे के और मैच सेंटर जाने से पहले शाहरुख़ ने सोशल मीडिया पर इस बात का इज़हार कर दिया था कि दिल तो उनका मेसी की तरफ है पर दिमाग़ Mbappe की तरफ और यह सिचुएशन ऐसी कही जाती है कि आप किसी के भी फैन नहीं हैं. यानि आप मैच सेंटर पहुंचे तो उसके पीछे आपका मकसद कुछ और था.

दरअसल शाहरुख़ के लिए यह फिल्म बहुत मायने रखती है. विवाद भले ही दीपिका के नाम से चल रहा है लेकिन उसका सीधा असर शाहरुख़ खान पर पड़ रहा है। सबको मालूम कि किंग खान की पिछली फिल्में सुपर फ्लॉप हुई हैं. उन्हें एक अदद हिट फिल्म की बहुत ज़रुरत है. एक और फ्लॉप फिल्म उनके कैरियर के लिए बहुत बड़ा धक्का साबित हो सकती है. इसलिए शाहरुख़ ने बाज़ीगरी दिखाते हुए अपनी फिल्म के प्रोमोशन के लिए फीफा फ़ाइनल के बड़े मंच का सहारा लिया। इतना बड़ा मंच पाने के लिए निश्चित ही शाहरुख़ ने काफी पैसा भी खर्च किया होगा. सच है नाकामी का डर इंसान को क्या क्या नहीं करवा देती।

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