मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और ईदगाह विवाद मामले पर आज सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 45 मिनट तक बहस हुई। दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन ने श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद मामले की सुनवाई तारीख 11 जुलाई की है।
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आज गुरुवार को जिला न्यायालय सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद मामले को लेकर सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद निर्णय सुनाया।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुस्लिम पक्ष सुनवाई के बहाने केस को लटकाने का प्रयास कर रहा है। पूर्व में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से संबंधित एक अन्य दावा जो अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और कई कृष्ण भक्तों द्वारा दाखिल किया गया है। उसके रिवीजन को स्वीकार कर जिला अदालत ने कहा था कि यहां प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट और लिमिटेशन एक्ट लागू नहीं होता। भक्त को भगवान की संपति के लिए दावा दायर करने का अधिकार है। लेकिन इसके बाद भी मुस्लिम पक्ष यही दलील दे रहा है और 7 रूल 11 पर बहस चाहता है। अदालत में हिन्दू पक्ष ने श्री कृष्ण जन्मभूमि से संबंधित दस्तावेज और जिला अदालत के आदेश की कॉपी मांगी। अदालत ने कहा कि जिला अदालत के आदेश की कॉपी दूसरी प्रतिबादियो को दें।
हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राजस्व अभिलेख और अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के दावे के रिवीजन में जिला कोर्ट के आदेश की कॉपी सिविल कोर्ट और प्रतिबादियो को दे दी है। हिंदू पक्ष ने कहा कि जल्द से जल्द विवादित स्थल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वहां कोर्ट कमिशन भेज कर रिपोर्ट मंगवाई है। सभी दस्तावेज हिंदुओं के पक्ष में है। श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट जमीन के असली मालिक है। भगवान श्रीकृष्ण के मूलगर्भ गृह को तोड़कर अवैध रूप से यहां ईदगाह का निर्माण कराया था। मुस्लिम पक्ष के पास कोई दस्तावेज नहीं है। मुगल काल से लेकर अब तक के सभी दस्तावेज साबित करते हैं कि जमीन हिंदू पक्ष की है।
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मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता शाही ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने कहा के वो 7 रूल 11 पर बहस चाहते हैं। हिंदू पक्ष ने जिला अदालत में दूसरे दावे पर हुई बहस का हवाला दिया। जिसको हाई कोर्ट में चैलेंज किया है। आज जो दस्तावेज मांगे थे उनकी कॉपी वादी पक्ष ने काफी देरी से हमें दी है। अदालत से आज हमने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा। हम दस्तावेजों को देखेंगे और 11 जुलाई को अगली तारीख पर अपनी आपत्ति दाखिल करेंगे।
