Site icon Buziness Bytes Hindi

शाह जी का जाटों को साधना


शाह जी का जाटों को साधना

अमित बिश्‍नोई

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान जाट बाहुल्य क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 58 सीटों पर 10 फरवरी को है. चुनाव प्रचार के लिए अब मुश्किल से दो हफ्ते का समय बचा है. निगाहें सभी पार्टियों की जाट समुदाय पर ही हैं और सभी पार्टियां इस वोट बैंक को साधने में जुट गयी हैं. राज्य और केंद्र के पिछले कई चुनावों में इस समुदाय ने भारतीय जनता पार्टी का जमकर साथ दिया लेकिन किसान आंदोलन और कुछ अन्य कारणों से कहा जा रहा है कि जाट समुदाय इसबार भाजपा से नाराज़ है. अब उनकी नाराज़गी दूर करने और उसे मनाने का बीड़ा पार्टी के चाणक्य केंद्र सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने उठाया है और इसी परिपेक्ष्य में लगभग ढाई सौ जाट नेताओं का आज दिल्ली में जमावड़ा हुआ, इन जाट नेताओं को अमित शाह के कहने पर बुलाया गया. वजह बताने की ज़रुरत नहीं कि इन्हें किस लिए बुलाया गया.

पता चला है कि बैठक के दौरान शाह जी ने खूब इमोशनल बातें कीं, पुराने रिश्ते याद दिलाये, सर भी झुकाया और अखिलेश को बाहरी भी बताया। भाजपा के चाणक्य ने एकबार फिर वही सब दोहराया जो 2019 की बैठक में कहा था. इस बैठक में राम मंदिर भी उल्लेख था और मुग़लों का ज़िक्र भी. झोली का फैलाना भी था और थोड़ा डराना भी कि साथ नहीं दिया तो क्या हो सकता है, कौन लोग आ सकते हैं और आप लोगों के साथ क्या कर सकते हैं.

Read also: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच 7 चरणों में होगा: चुनाव आयोग

इस बात का भी ज़िक्र था कि हमने आप लोगों की डांट भी खाई है कोई और होता तो रो देता। यह भी याद दिलाया कि 2014, 17 और 19 में आपने हमारा खूब साथ दिया, नाराज़ भी हुए मगर आपने हमारा साथ नहीं छोड़ा। फिर सवाल भी किया कि क्या इसबार आप हमारा नहीं अखिलेश का साथ दोगे, मुज़फ्फरनगर दंगों के फ़्लैश बैक में सबको भेजा गया. शाह जी ने यह भी याद दिलाया कि आप लोग राष्ट्रवादी हो और हम लोग भी राष्ट्रवाद को ही आगे बढ़ा रहे हैं. कैराना से पलायन की घटनाओं को फिर ताज़ा किया गया. और भी पता नहीं क्या क्या बातें हुईं, बस इतना समझ लीजिये कि टोटल इमोशनल ब्लैकमेलिंग।

बैठक के दौरान शाह जी ने जयंत को भी भटका हुआ बताया और जाट नेताओं से उन्हें समझाने को भी कहा. जाट थोड़ा भावुक और सामने वाले से सम्मान चाहने वाले लोग होते हैं और भाजपा के चाणक्य ने इस बैठक में इस बात का पूरा पूरा ध्यान रखा कि आप बड़े हैं हम छोटे. हमें डांट लीजिये, डपट लीजिये मगर बाहरी लोगों के पास अपनों को छोड़कर मत जाइये।

आज की बैठक का अगर आप विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि शाह जी ने पश्चिम को पार पाने के लिए अपने सारे हथकंडे, सारे हथियार आज़मा लिए. कितना असर होगा यह तो बाद में पता चलेगा, अमित शाह जी ने इमोशनल ब्लैकमेलिंग का जो कार्ड खेला है, किसान आंदोलन के बाद बने हालात में क्या वह असरदार होगा?, वैसे 2019 की बैठक के बाद तो यह इमोशनल कार्ड काफी कारामद साबित हुआ था.

Read also: गठबंधन से पहले ही दिखे सपा-रालोद के विचारों में मतभेद

वैसे शाह जी के आज के प्रयास ने अगर रंग दिखा दिया तो भाजपा का बेड़ा पार भी हो सकता है. टिकट बंटवारे को लेकर सपा-रालोद गठबंधन में छुपी हुई दरार दिखने लगी है, रालोद के निशान पर सपा के कई प्रत्याशी मैदान में हैं जिससे इस किसान पार्टी में अंदर ही अंदर काफी रोष है. कैराना में पलायन की घटनाओं में नामित नाहीद हसन का फिर से उम्मीदवार बनना भी भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है, इसके सहारे भगवा पार्टी क्षेत्र में अपनी ध्रुवीकरण की सियासत को और चमकाने का मौका मिल सकता है, शाह जी ने इस बैठक से पहले ही कैराना को लेकर अपने प्रयास शुरू भी कर दिए हैं, मुसलमानों से उन्हें कोई मतलब नहीं। एकमुश्त वोट के लिए जाट जाना जाता है और शाह जी ने आज उसी को साधने का पूरा प्रयास किया है और मुझे लगता है कि उनका यह प्रयास कामयाब है.

Exit mobile version