देखी जमाने की यारी, बिछडे़ सभी बारी-बारी…

आर्टिकल/इंटरव्यूदेखी जमाने की यारी, बिछडे़ सभी बारी-बारी…

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देखी जमाने की यारी, बिछडे़ सभी बारी-बारी…

सुनील शर्मा।

‘‘देखी जमाने की यारी, बिछडे़ सभी बारी-बारी…’’ अंधेरे कमरे में गुमसुम से बैठे राहुल बाबा यह दर्द भरे नगमा गा रहे थे कि अचानक शर्मा जी ने एंट्री मारी। राहुल बाबा को गुमसुम देखकर शर्मा जी थोड़े हैरत में पड़ गए। कुछ देर देखा, फिर सोचा फिर कुछ समझा और राहुल बाबा को समझाने के लिए आगे बढ़ गए। परेशान राहुल बाबा के कंधे पर हाथ रखकर शर्मा जी बोले, क्या हुआ राहुल बाबा, आप तो पार्टी के चिर युवा नेता हैं। अगर आप ही यूं परेशान-उदास रहेंगे तो पार्टी आगे कैसे बढ़ेगी।

शर्मा जी की बात सुनते ही राहुल बाबा के मन में दबी कुढ़न बाहर आ गई और बोले, अरे शर्मा जी आपको क्या मालूम, पार्टी तो बहुत आगे जा चुकी है। इतना आगे के हमारी ही पार्टी के नेता हमारे ही काबू में नहीं आ रहे हैं। पुराने नेता कुछ करते नहीं और युवाओं को लेकर आओ तो पुराने पार्टी छोड़कर भाग जाते हैं। जिन्हें नहीं पूछा उन्होंने तुरंत दूसरों का साथ पकड़ लिया। कोई कमल हाथ में उठाया घूम रहा है तो कोई साइकिल की सवारी करने चला गया है। अरे कुछ तो हाथी पर चढ़ने की भी कोशिश कर रहे हैं और कुछ हैं कि हल संभालने के लिये अपने कंधे मजबूत कर रहे हैं। अब बताओ करूं तो क्या करूं? पंजाब ने पहले ही जान ले रखी है, छत्तीसगढ़ में छत्तीसों नेता खिलाफ हो गए हैं। उत्तर प्रदेश की जनता के सवालों का उत्तर देते नहीं बना रहा। अब आप ही बताओ मेरी गलती क्या है।

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शर्माजी मौन थे और राहुल बाबा बोले चले जा रहे थे, अब पंजाब को ही ले लो, सोचा था चन्नी को सीएम बना कर चैन से बैठूंगा। बाकी जगहों पर कन्हैया बांसुरी बजाएगा और मेवानी वोटरों को मनाएगा। लेकिन हो तो उलटा ही रहा है। अब कैप्टन छोड़ कर चले गये, जिस पर भरोसा किया वो अपनी ही नव जोत सिद्ध करने में जुटा है। चन्नी तो बेचारा कुर्सी पर बैठने के दिन को याद कर रो रहा है। सी से एम तक का सफर करने का सपना हर दिन उसे टूटता नजर आ रहा है। अब आप ही बताओ शर्मा जी करें भी तो क्या करें।

अब बारी शर्मा जी की थी जो धरातल में धंसने को तैयार पार्टी को देखकर दिन-रात कुढ़ रहे थे। अपने गुस्से को काबू में करके शर्मा जी बोले राहुल बाबा गलतियां तो की हैं आपने। अब बताओ ओपनर बैट्समैन को ओपनिंग कराने की बजाये तीसरे नंबर पर मैदान में उतारोगे तो वह नाराज नहीं होगा। और क्या आप नहीं जानते की आपके सलामी बल्लेबाज की तो कभी अपने कप्तान से बनी ही नहीं। अरे वह तो एक कप्तान से ऐसा नाराज हुए की विदेशी दौरा बीच में ही छोड़ कर चले आये। उधर भी कैप्टन ए थे और इधर भी कैप्टन ए से ही मुकाबला था। तो आपने कैसे सोच लिया ऐसे ताबड़तोड़ बल्लेबाज की आपके कप्तान से निभेगी। इस बार मौका मिला तो उन्होंने कैप्टन ए का बदला कैप्टन ए से ले लिया, कप्तान ही नहीं उनकी पूरी टीम को ही मैदान से बाहर कर दिया।

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मगर शर्मा जी अब पार्टी की डूबती नैया कैसे किनारे पहुंचेगी, आप तो ज्ञानी पत्रकार हो कुछ तो बताओ। राहुल बाबा की गुहार सुन शर्मा जी बोले, अब कहने को कुछ बचा तो नहीं है राहुल बाबा, मगर कुछ कर सकते हो तो राजनीति धरातल पर, जनता के बीच जाकर करो। ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मंच पर आग उगलने की बजाए नेताओं-कार्यकर्ताओं को एकजुट करो, जनता के दर्द को महसूस करो उन्‍हें अपना बनाने की कोशिश करो। फैसले खुद ही लो मगर पार्टी के सीनियर नेताओं को भी उसमें शामिल करो। खुद पर भरोसा रखो, मगर कार्यकर्ताओं का भरोसा कम न होने दो। अगर ऐसा कर पाए तो पुराने दिन वापस आने में देर नहीं लगेगी। अगर देर कर दी यकीन मानिये यही गाना पड़ेगा, ‘‘ लुट गये सिंगार सभी बाग के बबूल से, और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे। कारवाँ गुजर गया, गुबार देखते रहे!’’

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