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Meerut: निगम की बैठक में पार्षदों के बीच हाथापाई,सदन में चली बोतलें

Meerut

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मेरठ। कई महीने बाद आज शुरू हुई निगम की बैठक हंगामे और मार पीट की भेंट चढ़ गई। पार्षदों में जमकर मारपीट हुई और बैठक में पानी की बोतलें चली। हंगामा देख निगम अधिकारी बैठक से बाहर चले गए। सफाई कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ हंगामा देखते ही देखते मेयर खेमे पार्षद और भाजपा पार्षदों के बीच हाथापाई तक पहुंच गया। इस दौरान एक दूसरे पर पानी की बोतले फेंकी गयी। मारपीट की सूचना के बाद पुलिस सदन में पहुंची। पुलिस से पार्षद उलझ गए। स्थिति अनियंत्रित होते देख महापौर सुनीता वर्मा व नगर आयुक्त डा. अमित पाल शर्मा सहित अन्य अधिकारी सदन छोड़ कर बाहर निकल गए।

महापौर सुनीता वर्मा हंगामे के बीच बैठक कल तक के लिए स्थगित करके बाहर निकलीं वैसे ही सफाई कर्मियों ने उनको घेर लिया। महापौर बोलीं वो तो वेतन बढ़ाने के पक्ष में हैं। देखते ही देखते सफाई कर्मचारी सदन में हंगामा करते हुए घुस गए। नारेबाजी करते हुए सफाई कर्मियों ने नगर आयुक्त डा अमित पाल शर्मा को घेर लिया। नगर आयुक्त सहित सभी निगम अधिकारी पीछे के दरवाजे से निकलकर तिलक हाल से घंटा घर पहुंचे लेकिन उनके पीछे सफाई कर्मचारी आ गए।इसके बाद नगर आयुक्त सहित सभी अधिकारी एसपी सिटी कार्यालय चले गए और बाहर से गेट बंद करा दिया। इसके बाद एसपी सिटी सफाई कर्मचारियों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाकर टाउन हाल परिषद तक छोड़ कर आए।
इससे पहले आज सुबह 11:30 बजे नगर निगम बोर्ड बैठक महापौर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता में शुरू हुई। कुछ देर बाद सफाई कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने को लेकर पार्षदों ने सदन में नारेबाजी शुरू की। सदन ‘सफाई कर्मचारियों के सम्मान में पार्षद मैदान में’, ‘16500 पास करो, ‘दीपावली बोनस दो’ जैसे नारे लगा रहे थे। मनोनीत पार्षद टीसी मनोठिया सदन में ही धरने पर बैठ गए।

इसी बीच पार्षद नीरज सिंह ने पोस्टर लहरा दिया। बोर्ड बैठक के बाहर सफाईकर्मचारियों का हंगामा जारी रहा। हालांकि इस हंगामे के बाद सफ़ाई कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। सदन की कार्यवाही के दौरान पार्षद अहसान अंसारी बैठक के दौरान धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि ‘ मेरा अपमान किया गया है। उसका जिम्मेदार कौन है ? पार्षद होने के बावजूद जनसुनवाई से धक्के देकर क्यों निकाला।’ सदन में सभी पार्षदों ने उनका समर्थन किया।

नगर निगम बोर्ड बैठक में गुप्ता कलोनी सड़क घोटाले को पार्षदो ने उठाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट और घोटालेबाज अफसर क्यों अब तक जमे बैठे हैं। कागज पर 600 मीटर की सड़क धरातल पर 300 मीटर निकली। नगर आयुक्त की जांच में दोषी पाए गए निर्माण अनुभाग के इंजीनियरों पर कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं हुई। पार्षदों ने नामांतरण शुल्क वृद्धि और 213 के नोटिस निरस्त कर दिए। इसके साथ छतरी पीर से लेकर किशनपुरा तक बनाए नाले में भ्रष्टाचार का आरोप पार्षदों ने लगाया।

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