वाशिंगटन। अंतरिक्ष अपने आप में काफी रहस्यों से भरपूर है। यहां असंख्य ग्रह और सितारे हैं। अब इसी अंतरिक्ष में वैज्ञानिकों को शराब यानी अल्कोहल भी मिली है। ये शराब अल्कोहल किसी अंतरिक्ष यात्री ने अंतरिक्ष में नहीं फेंकी। ये अल्कोहल एक सूक्ष्म आणविक रूप में मिला हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में प्रोपेनॉल के रूप में अब तक के सबसे बड़े अल्कोहल अणु की खोज की गई है। प्रोपेनॉल अणु दो के रूप में पाया जाता है। पहला सामान्य प्रोपेनॉल जिसे पहली बार उस इलाके में पाया जहां पर सितारे बन रहे हैं। दूसरा है आइसो प्रोपेनॉल है जो कि हैंड सैनेटाइजर बनाने के उपयोग में लाया जाता है। इन्हें आकाश गंगा के अंतरिक्ष में नहीं देखा गया। ये खोज उल्कापिंड और धूमकेतु जैसे खगोलीय पिंडों का निर्माण रहस्य जानने में सहायक होगी। प्रोपेनोल दोनों रूपों का मिलना प्रत्येक के गठन को निर्धारित करने में शक्तिशाली है।
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सितारों के पैदा होने वाले क्षेत्र सैगिटेरियस B—2 क्षेत्र में अल्कोहल अणु की उपस्थिति पाई गई है। ये हमारी मिल्की आकाशगंगा केंद्र के करीब है। सैगिटेरियस B—2 सैगिटेरियस ए के नजदीक है जो आकाश गंगा का बड़ा ब्लैकहोल है। अंतरिक्ष में इस तरह का आणविक विश्लेषण 15 साल से चल रहा है। पिछले 10 साल पहले चिली में अटाकामा लार्ज मिलिमीटर और सबमिलिमीटर एरे टेलीस्कोप तैनात किया गया। जिससे अब ये खोज और तेज हो गई है।
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अंतरिक्ष की गहराइयों तक साफ देखा जा सकता है। इसके कारण वैज्ञानिकों को ऐसे अणुओं की पहचान करने में मदद मिली है जो पहले कभी नहीं दिखाई देते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि सैगिटेरियस B—2 में अधिकतर इंटरस्टेलर अणुओं की खोज जारी है। जिससे ये पता लगाया जा सके कि तारे बनाने में किस तरह के अणु जुड़ते हैं। कार्बनिक अणु आइसो-प्रोपाइल साइनाइड और यूरिया भी अब तक अंतरिक्ष में मिल चुका है।
