- नवेद शिकोह
आज मुसलमानों का ख़ासकर शिया समुदाय का एक सांस्कृतिक त्योहार है “बाइस रजब”। ये नाम तारीख पर आधारित है। इस्लामी कलेन्डर में एक महीने का नाम रजब है। रजब माह की बाइस तारीख को मनाए जाने वाले इस त्योहार का नाम ही 22 रजब पड़ गया। जिस तरह 15 अगस्त या 26 जनवरी।
ये त्योहार शिया मुसलमानों के इमाम जाफर सादिक़ को समर्पित है। इस दिन विशेष प्रकार की टिकियों पर इमाम की नज्र दिलाई जाती है। नज्र के कई अर्थ हैं। इसका एक अर्थ किसी महान हस्ती की शान में पेश करना भी है।
अपने दौर के मशहूर सांइटिस्ट इमाम सादिक के तमाम रिसर्च आज भी प्रासंगिक हैं। विशेष प्रकार की मीठी टिकियां और तमाम स्वादिष्ट व्यंजनों पर इमाम की नज्र दिलाकर एक दूसरे के घर नज्र चखी जाती है। पाक नियत की जमीन पर इसे आप कला का प्रदर्शन भी कह सकते हैं । इसे सामाजिक समरसता या गेट टू गेदर भी कहा जा सकता है। नज्र में उपयोग 22 रजब की विशेष टिकिया का विशेष महत्व है। एक साइंटिस्ट के नाम नज्र दी जाने वाली बाइस रजब की टिकिया की रेसीपी की भी एक अलग साइंस है। ये बासी नहीं होती, इसे महीनों तक बिना फ्रिज में रखे भी खाया जा सकता है।
धर्म को संकीर्णता के दायरे में क़ैद करने वाले धर्म और धर्म की गाइड लाइन पेश करने वाले चरित्रों/अवतारों/देवताओं/इमामों/खलीफाओं को ही नहीं जानते। ना इन्हें पढ़ते हैं और ना इन्हें समझने की कोशिश करते हैं। गलत भ्रांतियों से मजहब और मजहबी रहनुमाओं को कट्टरता की संकीर्ण और दकियानूसी मनगढ़ंत सोच में क़ैद कर देते हैं।
दरअसल हर धर्म साइंस है, विद्या-ज्ञान है और ये जिन्दगी जीने का सलीक़ा सिखाता है। कुछ अज्ञानियों और सियासतदाओं ने धर्म का चोला पहनकर जीने का तरीका बताने वाली गाइड लाइन को मिस गाइडलाइन में तब्दील करने की कोशिश की है। झूठ के इन अंधेरों को भेदने के लिए धर्म की सांस्कृतिक रोशनी की ताकत को पहचानने की ज़रुरत है।
कब, कहां, क्यों, कैसे.. जैसी जिज्ञासा जब तथ्यपरक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा देती है तब धर्म का असली अर्थ समझ में आता है।
जहां-जहां ख़ुदा है वहां-वहा साइंस है। हर जगह ख़ुदा है। कण-कण में भगवान है, इसलिए हर जगह और कण-कण में सांइस है। हर धर्म साइंटिफिक लॉजिक पर आधारित है। जीवन-मृत्यु, सुबह-रात और संपूर्ण सृष्टि/कायनात विज्ञान के रहस्यों से रची है।
खान-पान भी वैज्ञानिक सत्य से ताल्लुक रखते हैं। खाने-पीने की हर चीज की विधि के पीछे भी साइंस का चमत्कार है। खाने का बासी होकर सड़ जाना, कीटाणु/रहित हो जाना भी विज्ञान है। खाने को ताजा रखने का तरीक़ा भी साइंटिफिक होता है। खाना बनाने की विधि भी साइंटिफिक होती है। एक विशेष विधि से तैयार पूरीनुमा सख्त मीठी टिकिया एक महीने से अधिक समय तक बिना फिज्र में रखे बासी नहीं होती। इसमें वैकटीरिया/किटाणु शामिल नहीं हो पाते। रवे और मैदे की गयी ये टिकिया काफी दिनों तक खराब नहीं होती।
ये टिकिया (मीठी पूरी या बिस्किट की तरह) काफी स्वीदिस्ट होती है। इसे ट्रेन के लम्बे सफर मे भी खाने के लिए उपयोग मे लाया जाता है।
किसी धर्म के सांस्कृतिक पहलुओं को समझने की कोशिश कीजिए। हर धर्म के पीछे साइंस भी है और सोशल साइंस भी है। धर्म एक ऐसा विश्वविद्यालय है जहां हर विषय का ज्ञान है। जियो और जीने दो का सिद्धांत है। प्यार-मोहब्बत, खान-पान, संस्कृति, साहित्य,राष्ट्रवाद, एकता-अखंडता, प्रगतिशीलता, सौहार्द और सदियों पुरानी साइंस की प्रांसगिकता साबित करने वाले तथ्य हैं।
