आज 23 जुलाई 2022 शनिवार को सुबह 11:28 से 24 जुलाई रविवार को दोपहर 01:45 तक एकादशी है। एकादशी का व्रत उपवास रविवार 24 जुलाई रहेगा। हिंदू धर्मशास्त्र में एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है। जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से मिलता है उससे कई गुना पुण्य एकादशी के व्रत से होता है। जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से मिलता है उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से मिलता है। एकादशी करने वालों के पितर नीच योनि से मुक्त हो जाते हैं। परिवार वालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं। यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है। धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है। कीर्ति बढ़ने के साथ ही श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है। जिससे जीवन रसमय होता है।
इसमे कोई संदेह नहीं कि एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है। एकादशी को दिया जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम पढ़ें। विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो दस माला गुरुमंत्र का जप कर लें। घर में झगडे होते हों तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े शांत होंगे।
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एकादशी के दिन ये सावधानी रहे
महीने में 15-15 दिन में एकादशी आती है। एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है। लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार लोग एकादशी न रख सके तब भी उनको चावल का त्याग करना चाहिए। कहा जाता है कि एकादशी के दिन जो लोग चावल खाते हैं उसके धार्मिक ग्रन्थ से एक-एक चावल एक-एक कीड़ा खाने का पाप लगता है।
