समृद्धि संस्था द्वारा जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जयंती पर ‘अखंड भारत की संकल्पना विषय’ पर संगोष्ठी का आयोजन

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लखनऊ: जगद्गुरु शंकराचार्य के प्राकट्य दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में आदि शंकर की अखंड भारत की कल्पना पर चर्चा हुई भारत समृद्धि संस्था के तत्वावधान में लखनऊ पब्लिक स्कूल, आशियाना, कानपुर रोड ब्रांच में आयोजित संगोष्ठी में आदि शंकर की आध्यात्मिक सांस्कृतिक एकता और अद्वैतवाद के दर्शन पर चर्चा हुई

संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित जी ने कहा की 12 शताब्दियों के बाद भी आज शंकराचार्य का कार्य समाप्त नहीं हुआ है। आज मनुष्य के अनेक ऐश्वर्या तथा विविध संपन्नता के रहते हुए भी उसके दुख संताप की सीमा नहीं है क्योंकि नए-नए मुंह तथा भ्रम उसकी ज्ञान बुद्धि को कृत्य किए हुए हैं परित्राण कहां है परित्रण केवल मनुष्य की आत्मा के आविष्कार में प्रतियोगिता संसार में प्राप्त एक ही है। आदि शंकराचार्य की जीवन का आज हमें नए रूप में स्मरण करना होगा और जीवन के अनेक विषयों को विज्ञान के साथ सम्मिलित करने की प्रेरणा तथा उसका उपाय शंकर के जीवन और उनकी वाणी से ग्रहण करना होगा। आदि शंकराचार्य एक महान दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक थे। उन्होने अद्वैत वेदान्त को ठोस आधार प्रदान किया।

इस अवसर पर बोलते हुए समृद्धि संस्था के अध्यक्ष और आल इंडिया पावर फ़ैडरेशन के चेयरमैन, श्री शैलेंद्र दुबे ने आदि शंकर के जीवन चरित्र और उनके द्वारा हिन्दू धर्म की स्थापना के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि ये आदि शंकर कि ही परिकल्पना है कि भारत के हर कोने में जहां वो गए वह हिन्दू धर्म का परचम लहरा रहा है। उन्होने सनातन धर्म की विविध विचारधाराओं का एकीकरण किया। उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई इनकी टीकाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। इन्होंने भारतवर्ष में चार मठों की स्थापना की थी जो अभी तक बहुत प्रसिद्ध और पवित्र माने जाते हैं और जिन पर आसीन संन्यासी शंकराचार्यकहे जाते हैं। वे चारों स्थान ये हैं-  ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रमश्रृंगेरी पीठद्वारिका शारदा पीठ और  पुरी गोवर्धन पीठ। ये भगवान शंकर के अवतार माने जाते हैं। इन्होंने ब्रह्मसूत्रों की बड़ी ही विशद और रोचक व्याख्या की है।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में श्री मनोज जी सह प्रांत प्रचारक (अवध क्षेत्र ) ने भी आदि शंकर के अखंड भारत कि परिकल्पना पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होने सनातन धर्म को मजबूत बनाने के लिए उन्होने 32 वर्ष कि आयु में भारत की संकृति और सनातन धर्म की स्थापना के लिए चारों मठों की स्थापना कर सनातन धर्म और देश को अखंड रूप से एक किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ की महापौर श्रीमति संयुक्त भाटिया जी ने किया और  कहा कि ये आदि शंकराचार्य जैसे गुरुओं कि दें है जिसके कारण आज भी भारत कि सनातन परंपरा जीवित है। उन्होने इस विषय पर सफल आयोजन करने के लिए समृद्धि संस्था और श्यामजी त्रिपाठी (उत्तर प्रदेश सदस्य बल अधिकार संरक्षण आयोग) का भी धन्यवाद किया। इस पूरे कार्यक्रम का संयोजन और संचालन श्री श्यामजी त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर समृद्धि संस्था के महामंत्री धीरज उपाध्याय और कोषाध्यक्ष त्रिवेणी मिश्रा और क्षेत्र के सभासद कमलेश सिंह मौजूद थे।

 

 

 

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