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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राह का रोड़ा बनते Akhilesh

Akhilesh

अमित बिश्‍नोई

अब ये धारणा बलवती होती जा रही है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की सत्ता में वापसी की राह का समाजवादी पार्टी रोड़ा बनती जा रही है, जिस तरह से अखिलेश यादव इन दिनों मध्य प्रदेश के दौरे कर रहे हैं और भाजपा से ज़्यादा कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं उससे साफ़ झलक रहा है कि मध्य प्रदेश में गठबंधन न होने से वो कांग्रेस से बहुत नाराज़ हैं और ये नाराज़गी उनके भाषणों में साफ़ झलक रही है, वो खुले आम कभी कांग्रेस पार्टी को चालू पार्टी कह रहे हैं तो कभी धोखेबाज़ पार्टी। अखिलेश मध्य प्रदेश में लोगों को बता रहे हैं कि दरअसल PDA की बढ़ती लोकप्रियता देखकर कांग्रेस पार्टी को डर लग रहा है कि कहीं उत्तर प्रदेश की तरह मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी कांग्रेस पार्टी की जगह न ले ले यही वजह कि सीट एडजस्टमेंट का वादा करके कांग्रेस नेता अंत समय पर मुकर गए। अब अखिलेश कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाना चाहते हैं और यही वजह है कि उन्होंने 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हालाँकि वो अच्छी तरह जानते हैं कि सिर्फ पांच छः सीटों पर ही सपा का थोड़ा बहुत प्रभाव है.

दरअसल कांग्रेस पार्टी के साथ सीट एडजस्टमेंट न हो पाने से अखिलेश यादव की उस महत्वाकांक्षा को बड़ा झटका लगा जो उन्होंने राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए पाली हुई है, इंडिया गठबंधन को अखिलेश एक अवसर के रूप में भुनाना चाह रहे थे, उनका मानना था कि केंद्र में वापसी के लिए बेचैन कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सीट शेयरिंग के लिए तैयार हो जाएगी और कांग्रेस के वोटों के ज़रिये वो इन राज्यों में भी अपनी कुछ ज़मीन बना लेंगे। इन तीनों राज्यों में अखिलेश का मध्य प्रदेश पर ज़्यादा ज़ोर था, पिछली बार उनका विधायक जीता भी था और दो जगह दूसरा स्थान मिला था मगर कमलनाथ ने अखिलेश की आशाओं पर ये कहकर पानी फेर दिया कि जिन 6 सीटों की अखिलेश यादव डिमांड कर रहे थे वहां के लोकल कार्यकर्ता इसके लिए बिलकुल भी तैयार नहीं हैं और मैं अपने कार्यकर्ताओं को नाराज़ नहीं कर सकता। दरअसल शिवराज सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को देखते हुए कांग्रेस पार्टी इन सीटों पर अपनी जीत देख रही है. कमलनाथ तीन सीटें देने को तैयार थे जो अखिलेश यादव को मंज़ूर नहीं था. इसके बाद दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच गरमागरम बयानबाज़ी बढ़ती गयी और बात बिगड़ती गयी, यहाँ तक कि कमलनाथ के मुंह से अखिलेश वखिलेश भी निकल गया जिसने आग में घी का काम किया , कांग्रेस के खिलाफ अखिलेश के तेवर उसी का नतीजा हैं।

पिछले एक हफ्ते से अखिलेश यादव सभाओं में जहाँ भाजपा के 18 साल के कुशासन का ज़िक्र करते फिर रहे हैं वहीँ हर सभा में कांग्रेस को धोखेबाज़ और चालू पार्टी कहने और उससे बचने की सलाह देने से नहीं चूकते। जातिगत जनगणना जहाँ कांग्रेस पार्टी का इन विधानसभा चुनाव में मुख्य मुद्दा है, हर चुनावी सभा में राहुल, प्रियंका और मल्लिकार्जुन खरगे के चुनावी भाषणों में इस मुद्दे का ख़ास स्थान होता है मगर अखिलेश का कहना है कि पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक यानि PDA की वजह से कांग्रेस पार्टी जातिगत जनगणना की बात करने पर मजबूर हुई है, अखिलेश का कहना है कि जातिगत जनगणना का मुद्दा तो समाजवादी ने उठाया और अब कांग्रेस पार्टी उसे अपना चुनावी हथियार बनाना चाहती है, लेकिन जनता जानती है कि कांग्रेस पार्टी ये मुद्दा सिर्फ सत्ता पाने के लिए उठा रही है वरना उसे जातिगत जनगणना में कोई दिलचस्पी नहीं, कांग्रेस पार्टी अगर इस मुद्दे पर गंभीर होती तो वो कांग्रेस शासित राज्यों में इसे शुरू करवा चुकी होती। अखिलेश तो ये भी आरोप लगा रहे हैं कि जातिगत जनगणना अंग्रेज़ों के ज़माने में होती थी लेकिन उसे रोकने वाली कांग्रेस पार्टी ही है.

50 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस का विकल्प बनने की बात कर रहे हैं. कल निवाड़ी में प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में दोनों पार्टियों के बीच बारी बारी का खेल चल रहा है लेकिन अब समाजवादी पार्टी यहाँ विकल्प के रूप में तैयार है और आने वाले समय में पीडीए को साथ लेकर एक नई इबारत लिखी जायेगी। कांग्रेस के प्रति अखिलेश के तेवर सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही नहीं हैं, उनकी बातों से साफ़ झलक रहा है कि 2024 के आम चुनाव में वो यूपी में कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका देने जा रहे हैं, सपा नेताओं द्वारा सभी 80 सीटों पर तैयारी की बात की जा रही है हालाँकि अखिलेश सहयोगियों के लिए 15 सीटें छोड़ने की बात कर रहे हैं, ये कौन सी सीटें होंगी इसके भी संकेत दिए जा चुके हैं, रालोद की पश्चिमी यूपी की सीटों के अलावा सपा अन्य सहयोगियों के लिए वो सीटें छोड़ने की बात कर रही है जो उसने आजतक कभी नहीं जीती, अब सहयोगियों में कांग्रेस पार्टी है या नहीं इसपर बड़ा सवाल है और क्या कांग्रेस पार्टी उन छोड़ी हुई सीटों पर राज़ी होगी। अखिलेश के कांग्रेस के खिलाफ तीखे तेवर मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का कितना नुक्सान करेंगे ये तो 3 दिसंबर को पता चलेगा लेकिन दोनों पार्टियों के बीच रिश्तों में खटास ज़रूर आ गयी है ये पक्का है और इस खटास का असर इंडिया गठबंधन पर भी पड़ सकता है.

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