Site icon Buziness Bytes Hindi

संतों को भी है अपनी जान का खतरा, मांग रहे सुरक्षा


संतों को भी है अपनी जान का खतरा, मांग रहे सुरक्षा

गनर पाने को मेला पुलिस कार्यालय और जिला पुलिस को आवेदन दे रहे हैं संत

हरिद्वार। जीवन क्षणभंगुर मात्र है, मृत्यु शास्वत सत्य है। जीवन-मृत्यु विधाता का लिखा विधान है जिसे कोई नहीं मिटा सकता। यह बातें आप अक्सर संतों के प्रवचनों में उनके श्रीमुख से सुनते होंगे। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि संतों को भी अपनी जान का खतरा होता है और वह उस खतरे को टालने के लिये पुलिस से सुरक्षाकर्मी दिये जाने की मांग भी कर रहे है। चैंका देने वाली बात यह है कि सुरक्षाकर्मियों की मांग वह संत कर रहे हैं जो कुंभ मेले में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजामों के बीच रहेंगे। अब तक पांच संतों को वाई श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करायी जा चुकी है और 26 संतों को सरकारी खर्च पर गनर उपलब्ध कराये जायेंगे। इसके बाद और भी संत मेला पुलिस कार्यालय और जिला पुलिस के पास गनर पाने का आवेदन दे चुके हैं। अब कुंभ मेले की सुरक्षा में जुटी पुलिस के बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वह इन संतों को सुरक्षा कैसे दें।

हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले में सुरक्षा के लिये आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, सीसीटीवी, ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने के साथ भारी संख्या में पुलिस बल, पैरा मिलिट्री फोर्स, एनएसजी कमांडो सुरक्षाबल तैनात किये जा रहे हैं। पांच हजार से अधिक पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बलों की 40 कंपनियां, एनएसजी के कमांडो और एटीएस की टीम के सुरक्षा घेरे के बीच परिंदे के भी पर मारने की गुंजाईष नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष और महामंत्री को कुंभ के दौरान वाई श्रेणी सुरक्षा और सभी 13 अखाड़ों के 26 प्रतिनिधियों को सरकारी खर्च पर गनर देने का एलान किया था। इस वक्त पांच संतो को वाई श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ प्रयागराज, अयोध्या, नासिक आदि से हरिद्वार आने वाले 26 संतों को सरकारी खर्च पर गनर उपलब्ध कराया जा चुका है। लेकिन इनके अलावा भी संत हैं जो मेला पुलिस कार्यालय और जिला पुलिस से सुरक्षा दिलाये जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इन संतों को न तो किसी ने कोई धमकी दी है और न ही पुलिस को यह समझ आ रहा है कि संतों को किससे जान का खतरा है।

मेला व जिला पुलिस संतों के आवेदन पर विचार कर रही है। वहीं जनपद की जीवन भय सुरक्षा समिति इन आवेदनों की जांच कर निर्णय लेगी की किसको सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। लेकिन अपने प्रवचनों में जीवन को मोह-माया बताने वाले संतों को भी अपनी जान का खतरा होने और पुलिस से सुरक्षा मांगने को लेकर पुलिस अधिकारी भी आश्चर्यचकित हैं। उन्हें भी यह समझ नहीं आ रहा है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच संतों को आखिर किससे जान का खतरा है।

Exit mobile version