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Russia Ukraine Crisis: यूक्रेन से लौटे भारतीय बच्चों ने बतायी आपबीती, दहल जाएगा दिल


Russia Ukraine Crisis: यूक्रेन से लौटे भारतीय बच्चों ने बतायी आपबीती, दहल जाएगा दिल

यूक्रेन संकट: अब भी तमाम भारतीय स्टूडेंट्स की जान हैं दांव पर

रंजीता सिन्हा

नई दिल्ली। यूक्रेन-रूस युद्ध (Russia Ukraine Crisis) में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स लगातार अलग-अलग फ्लाइट्स से वतन वापसी कर रहे हैं। यूक्रेन के अलग5अलग शहरों से लगभग उेढ़ हजार बच्च्े यहां वापसी कर चुके हैं, लेकिन गंभीर कर देने वाली हकीकत यह है कि यूक्रेन के तमाम ऐसे शहरों में भी भारतीय बच्चे, परिवार और कामगार फंसे हैं जहां से वापसी मुश्किल है। निकोलेव, खेरसन, कीव, खारकीव जैसे ये ऐसे शहर हैं जहां तबाही का मंजर है और रूस का अटैक यहां लगातार जारी है। इन्हीं शहरों के बंकर में छिपे भारतीय बच्चों का कोई पुरसाहाल नहीं है। एक खाने की थाली में कई-कई बच्चों को महज जीने की खातिर आश्रित रहना पड़ रहा है। यहां रात में तापमान माइनस दस तक चला जाता है।

इन संवेदनशील स्थानों पर छिपे बच्चों के कानों में धमाकों की आवाज के सिवाय कुछ नहीं सुनायी दे रहा। यूक्रेन से भारती पहुंचे भारतीय बच्चों से एक एक्सक्लूसिव बातचीत में रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई सामने आयी। बच्चों ने बताया कि स्थितियां विस्फोटक हैं।युद्ध इस कदर भयावह होता जाएगा हमने नहीं सोचा था। भारतीय स्टूडेंट्स (Indian students) जो गुरुवार को अलग-अलग उड़ानों से भारत (नई दिल्ली) पहुंचे। एक खास बातचीत में अहम जानकारियां मिलीं हैं। यहां पहुंचे बच्चों ने बताया कि केन्द्र सरकार के मंत्रीगण भी पोलैंड बॉर्डर और एयरपोर्ट पर पहुंच कर सभी भारतीयों को दिलासा दे रहे हैं, मदद कर रहे हैं।

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असल में एक महीने से भी ज्यादा वक्त से यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध (Russia Ukraine Crisis) की आशंका जतायी जा रही है, ऐसे में यूक्रेन प्रशासन ने इंडिया समेत दुनिया भर से यहां आकर पढऩे वाले स्टूडेंट्स को सतर्क रहने या समय रहते अपने-अपने ठिकानों पर निकल जाने को लेकर सतर्क नहीं किया। यहां तक कि गुजरी 16 फरवरी को भी रूस की ओर से यूक्रेन पर आक्रमण कर देने की धमकी दी गई थी। उस तारीख तक भी यूक्रेन इसको लेकर कोई एलर्ट जारी नहीं कर रहा था। स्टूडेंट्स सहमे हुए तो थे नेकिन इस बीच जब 16 तारीख को कोई आक्रमण नहीं हुआ सभी के मन में यह बात बैठ गई कि सबकुछ धमकी तक सीमित है और युद्ध की नौबत नहीं आएगी।

अपनी आपबीती साझा हुए यूक्रेन से भारत पहुंचे उत्तर प्रदेश सिद्धार्थनगर के रहने वाले एक मेडिकल स्टूडेंट मोहम्मद युसूफ ने बताया कि जंग के बीच हमारी क्लासेज चलतीं रहीं। टीचर्स ने भी यहीं कहा कि सब ठीक हो जाएगा। ऐसा नहीं हुआ, एक रात जब हम हॉस्टल में थे, रात में कई फाइटर प्लेन आसमान से गुजरे। सुबह जानकारी मिली कि हमारे इवानोफ्रान्सकिस्व शहर का एयरबेस रूस की मिसाइल से तबाह कर दिया। वहां से उठता धुएं का गुबार देखा। हम सभी दहल गये और अपनी जान बचाने की खातिर जैसे-तैसे वहां से भारत वापसी की जुगत में लग गये।

स्वदेश लौटे टांडा, अम्बेडकरनगर के रहने वाले हर्ष मिश्रा ने बताया कि युद्ध शुरू हो जाने के बाद हमारा एक-एक दिन बेहद कठिन गुजरा। अपने शहर लेविव से बॉर्डर तक पहुंचने में पल-पल जान दांव पर लगी थी। निरन्तर 22 दिनों से हम चल रहे थे, बॉर्डर तक पहुंचने से पहले भगदड़ के हालात हैं। हर कोई एक-दूसरे से आगे भाग निकल जाने की जुगत में है।

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यूके्रन से इंडिया लौटे यूपी की राजधानी लखनऊ (UP capital Lucknow) के एक मेडिकल छात्र ने बताया कि हम तो यहां जैसे-तैसे पहुंच गये लेकिन यूक्रेन के कई शहर ऐसे हैं जहां स्थितियां इस बेहद भयावह हैं। हमारे साथी छात्र साथी बंकर और ट्रेनों के यार्ड में छिपे बैठे हैं। अब खाने-पीने तक की दिक्कत हैं। क्या होगा उनका, उनकी हमें चिंता है। भारत सरकार को ऐसे फंसे अपने बच्चों को भी वहां से निकालना होगा। वहां टेलीकम्युनिकेशन व्यवस्था भी तबाह होने के कारण स्टूडेंट्स अपने घरवालों से बात तक नहीं कर पा रहे हैं।

एक स्टेूडेंट आशीष जो कानपुर निवासी है, का कहना है कि हम तो यूक्रेन के ऐसे शहरों से आये हैं जहां ज्यादा बममारी नहीं हो रही, लेकिन कीव, खाती, सूमी शहरों में निरन्तर बमबारी हो रही है। वहां बच्चों के बंकर से निकलने का मतलब जान गंवाना है। बंकर में खाने का संकट है, टेम्प्रेचर भी इस कदर गिर हो जाता है कि रहना मुहाल है। यदि उन्हें समय रहते नहीं निकला गया तो कई इंडियन्स की जान चली जाएगी।

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