Rupee Vs Dollar: पिछले छह माह में रूपया डॉलर के मुकाबले 0.16 प्रतिशत तक चढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है जुलाई में रुपए की कीमत फिर से गिर सकती है। विश्लेषकों के मुताबिक चालू वर्ष 2023—24 में प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं, उनसे डॉलर को मजबूती मिल रही है। रुपए की चाल पर विश्लेषकों का कहना है कि जुलाई के अंत तक रुपया 82.05 तक जा सकता है। कुछ ने रुपया में 82.25 तक गिरावट की बात कही है।
केंद्रीय बैंक सतर्क रुख पर कायम
रुपया 82.02 प्रति डॉलर पर बंद हुआ है। सोमवार को रूपया 81.96 पर बंद हुआ था। जो पिछले दो सप्ताह में सबसे ऊंचा स्तर था। विश्लेषकों का कहना है कि आगे डॉलर का सूचकांक मजबूत होगा। जिसका असर रुपए पर भी पड़ेगा। अधिकतर केंद्रीय बैंक सतर्क रुख पर कायम हैं। ब्याज दरों में वृद्धि का सिलसिला पूरा होता नहीं दिख रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के देशों में ब्याज दरों में इजाफा हो सकता है।’
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लगातार निवेश से साल के 6 महीने में रुपया 70 पैसे मजबूत हुआ। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि देश में सकारात्मक अनुमान से विदेशी निवेशक शेयरों में बने रहेंगे और रुपए को दम मिलने की संभावना है।
विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूती से बना
वहीं विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूती से बना है। जिससे रुपए को सहारा मिला है। इसी के साथ ही मुद्रास्फीति 2 से 6 प्रतिशत संतोषजनक दायरे में रहने और वृद्धि की संभावना अच्छी होने से ब्रेंट क्रूड 70 से 80 डॉलर बैरल के दायरे में रहने का मतलब भारत का आर्थिक परिदृश्य मजबूत है।’ भारतीय रिजर्व बैंक रुपए में उतार-चढ़ाव रोकने के लिए डॉलर खरीदकर अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की कोशिश में है। जिस कारण रुपए में तेजी के आसार नहीं हैं।
रिजर्व बैंक ने पहले ऐसा किया है। रिजर्व बैंक डॉलर की अधिक आवक खींचने की कोशिश में है। जिसके कारण विदेशी मुद्रा भंडार मार्च के 560 अरब डॉलर से 593 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। ऐसे में आरबीआई का रुख हाजिर बाजार से डॉलर खरीद कर विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का होगा। ब्याज दर में अंतर कम होने से फारवर्ड प्रीमियम पर असर पड़ने की संभावना है। जो अंत में भारतीय मुद्रा को प्रभावित कर सकती है। एक साल फारवर्ड प्रीमियम घटकर 1.68 प्रतिशत रह गई है। जो कि दिसंबर 2022 के बाद सबसे कम रही है।
