प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की चार दिवसीय बैठक आज 16 अक्टूबर से प्रयागराज में शुरू हुई है। भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक यमुनापार के गौहनिया स्थित वात्सल्य परिसर में शुरू हो गई। इसमे संघ के 45 प्रांत के अखिल भारतीय पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक की शुरुआत संघ प्रमुख डाक्टर मोहन भागवत ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर की। इसके बाद समाज के प्रमुख लोगों को श्रद्धांजलि दी गई जिनका हाल में निधन हुआ है। इनमें प्रमुख रूप से द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव शामिल रहे। बैठक 19 अक्टूबर तक चलेगी। इसमें पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन, संघ विस्तार मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रतिदिन चार से पांच बैठक इसमें आयोजित होगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए देशभर के 378 पदाधिकारी हैं। इसमें महत्वपूर्ण मसलों पर विमर्श होगा और आगे की रणनीति बनाई जाएगी।अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने आरएसएस की बैठक की रूपरेखा बताई। प्रचार प्रमुख ने बताया 16 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। बैठक में प्रतिदिन चार से पांच सत्र होंगे। आत्मनिर्भर भारत के साथ नारी सशक्तीकरण विमर्श होगा। हिंदू समाज को जागृत करने व मतांतरण जैसे मुद्दे उठेंगे। पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन पर जोर रहेगा। पिछड़ों और दलितों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास जारी है।कार्यकारी मंडल की बैठक में 45 प्रांतों के 378 पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। चार दिवसीय बैठक में पिछले वर्ष मार्च में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बनी वार्षिक योजना की समीक्षा भी की जाएगी।
2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उसे ध्यान में रखते हुए कार्य विस्तार की योजना है। संघ की देशभर में 55 हजार स्थानों पर शाखाएं हैं। मार्च 2024 तक इसको एक लाख स्थानों तक पहुंचाने की योजना है। आरएसएस सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ग से संवाद पर जोर देगा। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मुस्लिम समाज से संवाद का आमंत्रण आता है तो उस पर भी विचार किया जाएगा। अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में नागपुर में 14 नवंबर से आठ दिसंबर तक होने वाले संघ शिक्षा वर्ग की तैयारियों पर भी चर्चा होगी। इससे पूर्व संघ शिक्षा वर्ग मई मेंआयोजित हुआ था।
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि आरएसएस बैठक में मुस्लिम, ईसाई व अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के साथ विशेष रूप से वैचारिक आदान-प्रदान की रणनीति भी बनाई जाएगी। राष्ट्रीय एकता को बढ़ाते हुए सशक्त राष्ट्र की अवधारणा को मूर्तरूप देने का प्रयास कर संघ के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर बढ़ने का लक्ष्य है। विजयदशमी पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन में जिन विषयों पर जोर दिया उन पर भी कार्यकारी मंडल उन पर विशेष चर्चा करेगा। इसमें मातृ भाषा में शिक्षा, जनसंख्या असंतुलन, महिला सहभागिता के अलावा सामाजिक समरसता और समाज के सभी वर्ग के साथ संवाद भी प्रमुख है। संघ प्रमुख 12 अक्टूबर से प्रयागराज में प्रवास पर हैं। जहाँ पर वो कार्यकारी मंडल की बैठक में पदाधिकारियों का मार्गदर्शन करेंगे।
